प्रदेश हाईकोर्ट ने साल 2013 में केंद्र सरकार की ओर से शुरू की गई छात्रवृत्ति योजना के लिए मेधावी छात्रा का नाम न भेजने पर वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला अंबोटा जिला ऊना के प्रधानाचार्य पर 10 हजार की कॉस्ट लगाई है।
न्यायाधीश चंद्र भूषण बारोवालिया ने यह फैसला तनूजा बेगम द्वारा दायर याचिका की सुनवाई के दौरान दिया। कोर्ट ने प्रधानाचार्य को आदेश दिए कि वह तीन सप्ताह के भीतर प्रार्थी का आवेदन भरने के बाद केंद्र सरकार को भेजे।
केंद्र सरकार को आदेश दिए कि वह प्रार्थी को स्कालरशिप देने के बाबत चार सप्ताह के भीतर निर्णय लें। याचिका में दिए तथ्यों के अनुसार प्रार्थी ने जमा दो कक्षा की परीक्षा में 86.4 फीसदी अंक हासिल किए थे।
केंद्र सरकार ने हायर एजूकेशन के लिए मेधावी छात्रों को स्कॉलरशिप देने के उद्देश्य से इंस्पायर के नाम से स्कीम शुरू की थी। जिसमें 80,000 रुपये सालाना के हिसाब से पांच वर्षों तक दिए जाने का प्रावधान बनाया गया था।