निगम आयुक्त को अगली सुनवाई के दौरान कोर्ट में उपस्थित रहने के भी आदेश दिए। मामले पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि शहर को आने वाला 50 लाख लीटर पानी बरबाद हो रहा है। हो सकता है कि यह पानी लीकेज व चोरी में बरबाद हो रहा हो।
कोर्ट ने खेद जताया कि मुख्य सचिव के शपथपत्र में पानी की इतनी बड़ी बरबादी रोकने के लिए उठाए जा रहे या उठाए गए कदमों का जिक्र नहीं है। यह भी नहीं बताया कि पानी की लिफ्टिंग के लिए क्या आधुनिक प्रणाली इस्तेमाल में लाई जा रही है।
उधर, नगर निगम ने की मैन की वीडियो रिकॉर्डिंग को असंभव बताते हुए आदेशों में संशोधन की अर्जी दी थी। निगम ने सुनवाई के बाद इस अर्जी को वापस ले लिया।