हिमाचल हाईकोर्ट ने धर्मशाला को दूसरी राजधानी बनाने के खिलाफ दायर याचिका पर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर छह सप्ताह के भीतर जवाब तलब किया है। न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने प्रार्थी परेश शर्मा की ओर से दायर याचिका की प्रारंभिक सुनवाई के बाद ये आदेश पारित किए।
मामले पर सुनवाई अब 12 जून को होगी। प्रार्थी परेश शर्मा ने धर्मशाला को दूसरी राजधानी बनाने की तीन मार्च की अधिसूचना को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। प्रार्थी का आरोप है कि सरकार ने केवल राजनीतिक फायदे के लिए यह फैसला लिया, जबकि मौजूदा परिस्थितियों में इसकी कोई आवश्यकता नहीं है। प्रशासनिक सुधार आयोग की सिफारिशों के बगैर यह निर्णय लिया गया है।
प्रदेश की वित्तीय और भौगोलिक परिस्थितियों को भी ध्यान में नहीं रखा गया है। छोटे राज्य में दो राजधानियों की जरूरत समझ से परे है। यह निर्णय जनहित में भी नहीं है। दूसरी राजधानी को नीति निर्धारण शक्तियों की आड़ में बनाना कानूनी रूप से गलत है। राज्य सरकार इस तरह का गैर कानूनी और मनमाना फैसला नहीं ले सकती है।
45 हजार करोड़ के कर्ज में दबा प्रदेश, विधायक भी खिलाफ
प्रार्थी ने याचिका में कहा है कि प्रदेश पहले ही 45 हजार करोड़ रुपये के कर्ज के बोझ में दबा हुआ है। मौजूदा सरकार के अपने विधायक भी इस फैसले को तर्कहीन और नाजायज बता रहे हैं। प्रार्थी ने दूसरी राजधानी की अधिसूचना खारिज करने की मांग की है।