अदालत ने निदेशक उद्योग, प्रदेश भूवैज्ञानिक, उपायुक्त हमीरपुर, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और कैलाश स्टोन क्रशर से भी जवाब तलब किया है। मुख्य न्यायाधीश एए सैयद और न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई 7 दिसंबर को निर्धारित की है।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अवैध खनन के मामले में सचिव उद्योग को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। अदालत ने निदेशक उद्योग, प्रदेश भूवैज्ञानिक, उपायुक्त हमीरपुर, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और कैलाश स्टोन क्रशर से भी जवाब तलब किया है। मुख्य न्यायाधीश एए सैयद और न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई 7 दिसंबर को निर्धारित की है। हमीरपुर जिले की ग्राम पंचायत पहालू की ओर से दायर याचिका की प्रारंभिक सुनवाई के बाद अदालत ने यह आदेश पारित किए। याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रतिवादी कैलाश स्टोन क्रशर को राज्य सरकार ने खनन के लिए कुछ क्षेत्र लीज पर दिया है। 21 फरवरी, 2022 को उसकी लीज का नवीनीकरण किया गया। क्रशर की ओर से खनन की आड़ में कृषि योग्य भूमि को नष्ट किया जा रहा है। खनन के लिए चिह्नित स्थान के बजाय कृषि योग्य भूमि के निकट खनन किया जा रहा है। याचिकाकर्ता ने अदालत से गुहार लगाई है कि प्रतिवादी कैलाश स्टोन क्रशर की लीज का नवीनीकरण रद्द किया जाए।
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दुष्कर्म और अपहरण के दोषी की सजा हाईकोर्ट से बरकरार
प्रदेश हाईकोर्ट ने दुष्कर्म और अपहरण के जुर्म के लिए सुनाई गई सजा को बरकरार रखा है। उत्तराखंड निवासी जितेंद्र सिंह उर्फ जीतू को निचली अदालत ने सात वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सोलन ने दोषी को 20 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया था। जुर्माना अदा न करने की सूरत में दोषी को एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास काटने के आदेश दिए गए थे। अभियोजन पक्ष के अनुसार 7 मई, 2016 को दोषी नाबालिग को बहला-फुसला कर देहरादून ले गया। शादी का झांसा देकर उसने नाबालिग के साथ दुष्कर्म किया। लड़की के पिता की शिकायत पर पुलिस ने दोषी को पकड़ा। दोषी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 363, 366 और पोक्सो अधिनियम की धारा 4 के तहत मामला दर्ज किया गया। जांच पूरी होने के बाद अभियोजन पक्ष ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सोलन की अदालत में चालान पेश किया। अदालत ने आरोपी को दुष्कर्म और अपहरण के जुर्म का दोषी ठहराया था। इस निर्णय को दोषी ने हाईकोर्ट के समक्ष अपील के माध्यम से चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने मामले से जुड़े तमाम रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद पाया कि अभियोजन पक्ष दोषी के खिलाफ अभियोग साबित करने में सफल रहा है। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि निचली अदालत ने गवाहों के ब्यानों को सही तरीके से सराहा है।