फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

HP High Court: कर्मचारियों की सेवा शर्तों में मनमानी समानता सिद्धांत के विरुद्ध

Tue, 28 Mar 2023 11:23 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला

सार

हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि राज्य और इसके उपकरण कर्मचारियों की कुछ श्रेणियों के लिए वेतनमान निर्धारण में मनमानी नहीं कर सकते है। समान श्रेणी के कर्मचारियों से मनमानापन भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 के विपरीत है।
विज्ञापन
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

समानता के अधिकार के संदर्भ में प्रदेश हाईकोर्ट ने अहम निर्णय सुनाया है। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर ने कहा कि कर्मचारियों की सेवा शर्तों में मनमानी करना समानता के सिद्धांत के विरुद्ध है। अदालत ने याचिकाकर्ता को वर्ष 1986 से संशोधित वेतन देने के आदेश दिए हैं। साथ ही बकाया राशि को 30 जून 2023 तक पांच फीसदी ब्याज सहित अदा करने को कहा गया है। याचिकाकर्ता भारत सिंह कंवर और अन्य की याचिका का निपटारा करते हुए अदालत ने यह निर्णय सुनाया। हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि राज्य और इसके उपकरण कर्मचारियों की कुछ श्रेणियों के लिए वेतनमान निर्धारण में मनमानी नहीं कर सकते है। समान श्रेणी के कर्मचारियों से मनमानापन भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 के विपरीत है। राज्य सरकार के ऐसे मनमाने निर्णय की न्यायिक समीक्षा कर हस्तक्षेप किया जा सकता है।

विज्ञापन


याचिकाकर्ता हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम में वर्ष 1983 में नियुक्त हुए थे। उस समय उनका वेतनमान 570-1080 रुपये मासिक था। इस वेतनमान को वर्ष 1994 में संशोधित कर 1500-2640 कर दिया गया था। उसके बाद इस वेतन को संशोधित कर 2000- 3500 रुपये कर दिया था। निगम ने कुछ श्रेणी को संशोधित वेतनमान का लाभ वर्ष 1986 से और याचिकाकर्ताओं को वर्ष 1994 से दिया। याचिकाकर्ताओं के विरुद्ध निगम ने दलील दी कि उन्हें यह वेतनमान वित्त विभाग की स्वीकृति के बाद दिया गया है। अदालत ने मामले से जुड़े रिकॉर्ड का अवलोकन के बाद पाया कि निगम की ओर से वेतन विसंगति का यह निर्णय कानूनी गलत है। अदालत ने याचिका को स्वीकार करते हुए यह निर्णय सुनाया।

जंगी-थोपन-पोवारी प्रोजेक्ट मामले में बहस के लिए सरकार ने मांगा वक्त
 हाईकोर्ट में लंबित जंगी-थोपन-पोवारी प्रोजेक्ट के मामले पर बहस के लिए सरकार ने अतिरिक्त समय मांगा है। अदालत ने मामले की सुनवाई 10 अप्रैल निर्धारित की है। इस मामले में अदालत ने अदाणी समूह और राज्य सरकार की दोनों अपीलों पर सुनवाई एक साथ निर्धारित की है। बता दें कि किन्नौर जिले की जंगी-थोपन-पोवारी जलविद्युत परियोजना शुरू से ही विवादों में रही है। विदेशी कंपनी ब्रेकल के बाद अदाणी समूह भी इस परियोजना को नहीं बनाना चाहता है। 960 मेगावाट के महत्वपूर्ण हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट को ब्रेकल को वर्ष 2007 में आवंटित किया गया था।
विज्ञापन


कंपनी ने खुद को दिवालिया घोषित कर दिया और अपफ्रंट राशि जमा नहीं करवाई। इसके बाद यह प्रोजेक्ट अदाणी समूह को दिया गया। समूह ने प्रीमियम के तौर पर 280.06 करोड़ रुपये जमा करवा दिए। बाद में इस परियोजना के टेंडर को रद्द कर दिया गया। ब्रेकल कंपनी ने हिमाचल सरकार से पत्राचार किया और अगस्त 2013 को अदाणी समूह के पार्टनर के तौर पर 280.06 करोड़ रुपये को ब्याज सहित वापस करने के लिए आग्रह किया।

अक्तूबर 2017 में कैबिनेट मीटिंग में तत्कालीन वीरभद्र सिंह की सरकार ने फैसला लिया था कि अदाणी समूह को पावर प्रोजेक्ट की 280 करोड़ रुपये की अपफ्रंट राशि वापस की जाएगी। मगर पांच दिसंबर, 2017 को सरकार ने अदाणी ग्रुप पर दिखाई गई 280 करोड़ की मेहरबानी वाला फैसला वापस ले लिया। मामला प्रदेश हाईकोर्ट में पहुंचा और फिर लंबा कानूनी विवाद शुरू हुआ।

 

विज्ञापन

अटल टनल के पास गंदगी होने के मामले की सुनवाई 10 अप्रैल निर्धारित

अटल टनल के आसपास कचरे को रोकने के लिए जो प्रावधान बनाए गए है, उनकी जानकारी दो दिन के भीतर हाईकोर्ट को दी जाएगी। राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि इस मामले की स्टेटस रिपोर्ट तैयार है। इसे दो दिनों के भीतर अदालत के रिकॉर्ड में लाया जाएगा। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सबीना और न्यायाधीश सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई अब 10 अप्रैल निर्धारित की है।
अदालत ने मुख्य सचिव से गंदगी रोकने के लिए बनाए गए प्रावधानों की जानकारी तलब की थी।

टनल के आसपास गंदगी फैली होने के बारे में छपी खबरों पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया था। अदालत ने गंदगी को हटाने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी कोर्ट के समक्ष रखने के आदेश दिए थे। कोर्ट ने गंदगी फैलाने वालों पर जुर्माना लगाने वाले नियम व पिछले एक वर्ष में वसूल किए गए जुर्माने की रकम की जानकारी भी मांगी थी। बता दें कि अटल टनल एक प्रसिद्ध पर्यटक स्थल के रूप में उभरा है। बड़ी तादाद में पर्यटक लाहौल की खूबसूरत वादियों में घूमने के लिए अटल टनल से ही आवाजाही करते हैं। पर्यटकों द्वारा अटल टनल के आसपास कचरा फैलाया जा रहा है। यहां न तो पर्याप्त कूड़ेदान है और न ही पुरुषों और महिलाओं के लिए पर्याप्त शौचालय हैं।
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें