शिमला शहर के बंधित और प्रतिबंधित सड़क मार्गों पर चुनिंदा वाहनों की आवाजाही को हाईकोर्ट ने हरी झंडी दे दी है। वीरवार को हाईकोर्ट ने वाहनों की आवाजाही पर लगाए प्रतिबंध में ढील देते हुए याचिका का निपटारा कर दिया है। कोर्ट ने शहर के आम आदमी को राहत देते हुए शहर के प्रतिबंधित मार्गों पर एचआरटीसी की टैक्सियों को बेरोकटोक चलाने की मंजूरी दे दी है।
कोर्ट ने रेलवे बोर्ड बिल्डिंग से होते हुए सीटीओ तक भी एचआरटीसी की टैक्सियां चलाने को मंजूरी दे दी है। इसके अलावा शिल्ली चौक से छोटा शिमला होते हुए मजीठा हाउस तक चार नई टैक्सियां चलाने की इजाजत भी दी। कोर्ट ने अपने फैसले में वकीलों और मान्यता प्राप्त पत्रकारों को सील्ड सड़कों पर गाड़ी चलानी की मंजूरी भी दी है। मंत्रियों और विधायकों की गाड़ियों को माल रोड पर पार्क करने पर कोर्ट ने रोक बरकरार रखी है।
इनकी गाड़ियों को शिल्ली चौक से मैट्रोपोल तक आने-जाने की अनुमति ही दी गई है। उधर, शहर की सभी सील्ड सड़कों के लिए जारी परमिट निलंबित ही रहेंगे। सुनवाई के बाद परमिटों को रद्द भी किया जा सकता है। यह सुनवाई परमिट जारी करने वाले अधिकारी करेंगे। वीरवार को न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायाधीश सुरेश्वर ठाकुर की खंडपीठ ने अपने आदेशों में कहा कि शिमला के बंधित और प्रतिबंधित सड़कों को बनाने के प्रावधान के पीछे जो मंशा थी, उसे पूरा नहीं किया जा रहा है। माल रोड हो या रिज मैदान।
अपने रसूख को दिखाने के लिए जैसे तैसे गाड़ियों को इन सड़कों पर दौड़ाने के लिए परमिट लिए और दिए जा रहे हैं। यदि हम शिमला शहर को अंतरराष्ट्रीय मानचित्र के पर्यटन स्थल के तौर पर देखना चाहते हैं तो हमें कायदे कानूनों का पालन करना होगा। हाईकोर्ट ने अपने पिछले आदेशों में ढील देते हुए आदेश दिए कि सील्ड सड़कों पर राज्य स्तरीय मान्यता प्राप्त पत्रकारों अथवा हाईकोर्ट द्वारा प्रमाणित पत्रकारों को वाहन चलाने के लिए परमिट अथवा इजाजत दी जाएगी।
कोर्ट ने इसमें शर्त रखी है कि वह पत्रकार या तो स्वयं परमिट वाली गाड़ी को चलाए या गाड़ी में बैठा हो। कोर्ट ने अपने आदेशों में स्पष्ट किया कि सील्ड सड़क रेलवे बोर्ड बिल्डिंग की बजाए स्टेट बैंक आफ इंडिया से सीटीओ तक मानी जाएगी। कोर्ट ने वकीलों को भी कनेडी हाउस से बालूगंज और विंटर फील्ड से डीसी आफिस तक जाने के लिए परमिट जारी किए जाएंगे।