मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार उच्च न्यायालय की मदद से शिमला के घणाहट्टी में लॉ यूनिवर्सिटी खोलने जा रही है। इसके लिए भूमि चिन्हित कर ली गई है। इसके अलावा अत्याधुनिक न्यायिक अकादमी भी स्थापित की जा रही है।
मुख्यमंत्री शुक्रवार को पीटरहॉफ में ‘न्याय वितरण प्रणाली का सुदृढ़ीकरण: उपकरण व तकनीक’ विषय पर उत्तरी राज्यों के क्षेत्रीय न्यायिक सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर बोल रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून के छात्रों को विश्वस्तरीय शिक्षा देने की आवश्यकता है, जिससे वे बेहतर न्यायिक सेवाएं दे सकें।
सीएम ने अधीनस्थ न्यायालयों में पांच साल से अधिक अवधि से लंबित मामलों की संख्या में आठ प्रतिशत कमी आने पर प्रसन्नता जताई। उन्होंने कहा कि लोगों की कानूनी आवश्यकताओं, फास्ट ट्रैक न्यायालयों की भूमिका को देखते हुए प्रदेश में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीशों के नौ नियमित न्यायालय और एक सीबीआई न्यायालय सृजित किए हैं।
एक वर्ष में 28 हजार मामले निपटाए : सीजे
गत दो वर्षों के दौरान 15 सिविल जज और छह अतिरिक्त जिला न्यायाधीश नियुक्त किए गए हैं। यह आवश्यक हो गया है कि मामलों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित हो। इस मौके पर विधि मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने कहा कि प्रदेश सरकार न्यायिक अधिकारियों को मूलभूत सुविधाएं देने के साथ-साथ हर तरह से सहयोग करेगी।
हिमाचल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर ने कहा कि विधि आयोग की 245वीं रिपोर्ट में प्रदेश की न्यायिक प्रणाली को देश की बेहतरीन प्रणाली में शामिल किया है। रिपोर्ट के अनुसार जिलों के अधीनस्थ न्यायालयों में 5 वर्षों से ज्यादा समय से लंबित मामलों के निपटारे में हिमाचल का छठा स्थान है। हाईकोर्ट ने इस साल 28 हजार मामलों का निपटारा किया है।