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Himachal News: प्रदेश सरकार के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने पर चार शिक्षक निलंबित, कार्रवाई के बाद अनशन शुरू

Sat, 26 Apr 2025 09:17 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला

सार

सरकार ने मनाही के बावजूद प्रदर्शन में शामिल होने वाले शिक्षकों पर कड़ी कार्रवाई करने का फैसला लिया है।
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शिमला के चौड़ा मैदान में प्राथमिक शिक्षक अपनी मांगों के समर्थन में धरना देते हुए। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश  सरकार के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने वाले प्राथमिक शिक्षक निलंबित होंगे। रोक के बावजूद प्रदर्शन में शामिल शिक्षकों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इनका एक दिन का वेतन कटेगा। गैर शिक्षण कार्य करने से इन्कार करने वाले शिक्षकों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी जाएगी। शनिवार को शिमला के चौड़ा मैदान में हुए प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदर्शन पर सरकार ने कड़ा संज्ञान लिया है। शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली को तुरंत कार्रवाई करने के लिए कहा है। इसके बाद सरकार ने छह शिक्षकों के निलंबन आदेश भी जारी किए।

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संघ के उन सदस्यों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का शिक्षा सचिव ने निर्देश दिया है, जिन्होंने सरकार के नीतिगत निर्णयों के विरोध में सार्वजनिक विरोध प्रदर्शनों-आंदोलनों में भाग लिया है। शिक्षा सचिव ने कहा कि 25 अप्रैल को शिक्षा विभाग ने शिक्षकों को किसी भी तरह के विरोध या आंदोलन में शामिल न होने की सलाह दी थी। शनिवार को संघ के पदाधिकारी और सदस्य सार्वजनिक प्रदर्शनों में भाग लेते देखे गए। शिक्षकों ने राज्य के शिक्षण संस्थानों के लिए सरकार की पुनर्गठन और युक्तिकरण पहल की आलोचना की। शिक्षा सचिव ने सरकार के नीतिगत निर्णयों और विभाग के अधिकारियों के खिलाफ शिक्षकों द्वारा की गई अपमानजनक टिप्पणियों पर असहमति व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि कर्मचारी संघों से सेवा संबंधी हितों की रक्षा की अपेक्षा की जाती है, लेकिन वे खुले तौर पर सरकारी नीति की आलोचना या उसे कमजोर करने के हकदार नहीं हैं।

ऐसे में शिक्षा सचिव ने स्कूल शिक्षा निदेशक को निर्देश दिया है कि आंदोलन में भाग लेने वाले सभी शिक्षकों की पहचान कर अनुशासनात्मक कार्रवाई करें, जिसमें उनकी अनुपस्थिति को डाइस-नॉन (बिना सेवा-अवकाश के बिना भुगतान रहित अवकाश) के रूप में चिह्नित करना शामिल है। जिन शिक्षकों ने सरकारी नीतियों के खिलाफ सार्वजनिक बयान दिए या अपमानजनक टिप्पणी की, उन्हें तत्काल निलंबित करें। कुछ शिक्षकों और पदाधिकारियों ने अपने साथियों को ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली का बहिष्कार करने, ऑनलाइन शैक्षणिक जिम्मेदारियों से इन्कार करने और मिड-डे मील योजना के तहत कर्तव्यों का पालन न करने का निर्देश दिया है। इन कृत्यों को सरकारी निर्देशों का घोर उल्लंघन माना गया है। जिला उपनिदेशकों को ऐसे कार्यों की निगरानी करने का निर्देश दिया है। ऐसे शिक्षकों को केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियम 56 (जे) के तहत अनिवार्य सेवानिवृत्ति सहित गंभीर दंड का सामना करना पड़ सकता है। नियम 56(जे) के दायरे से बाहर के शिक्षकों के लिए निलंबन सहित तत्काल और सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई का आदेश दिया है।

सरकार के कड़े रुख के खिलाफ शिक्षकों का क्रमिक अनशन शुरू
 शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश मिलने के बाद प्राथमिक शिक्षकों ने शिक्षा निदेशालय के परिसर में क्रमिक अनशन शुरू कर दिया है। शनिवार को पांच शिक्षक अनशन पर बैठे। रविवार दोपहर दो बजे इनकी जगह दूसरे शिक्षक बैठेंगे। प्राथमिक शिक्षक संघ ने अन्य शिक्षकों को सोमवार से स्कूलों में नियमित सेवाएं देने के लिए कहा है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश शर्मा ने कहा कि सरकार को मांगों पर विचार करना चाहिए था। ऐसा करने के बजाय कार्रवाई के निर्देश दे दिए। शिक्षकों को अधिकारों से वंचित किया जा रहा है। मांगों को जब तक पूरा नहीं किया जाएगा, अनशन जारी रहेगा। शनिवार को अनशन पर संघ के अध्यक्ष जगदीश शर्मा, महासचिव संजय, रमेश बिजलवान, प्रताप ठाकुर और दिनेश कुमार बैठे।
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प्राथमिक शिक्षकों ने सरकार के खिलाफ बोला हल्ला
 सरकार की चेतावनी के बावजूद प्राथमिक शिक्षकों ने शनिवार को राजधानी शिमला के चौड़ा मैदान में प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने सरकार के खिलाफ हल्ला बोलते हुए शिक्षा सचिव राकेश कंवर के खिलाफ नारेबाजी की। शिक्षा निदेशालयों के पुनर्गठन का विरोध करते हुए शिक्षकों ने कहा कि अगर उन्हें निलंबित भी कर दिया तो भी वे पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि शक्तियों से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दोपहर बाद प्राथमिक शिक्षक संघ के एक प्रतिनिधिमंडल ने स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली से मुलाकात कर उन्हें अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। प्राइमरी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश शर्मा ने कहा कि संघ ने शनिवार को सिर्फ सांकेतिक धरने का एलान किया था। सरकार ने कड़ी कार्रवाई कर शिक्षकों को निराश किया है। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार एक निदेशालय के गठन से शिक्षा में गुणवत्ता की बात कह रही है, जबकि सच्चाई ये है कि इससे प्राथमिक शिक्षा को पूरी तरह से खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है। प्रदेश में सबसे बड़ा कैडर प्राथमिक शिक्षकों का ही है। उनकी नाराजगी मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से नहीं है लेकिन शिक्षा सचिव लगातार उनके विरोध में रहे हैं। इससे पहले भी इस मुद्दे पर सरकार के साथ बातचीत हो चुकी है लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिलते रहे उनका कोई हल नहीं निकला। 
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