हिमाचल सरकार ने मेलों की सरकारी ग्रांट-इन-एड बढ़ाकर दोगुना कर दी है। इसका लाभ प्रदेश भर में आयोजित किए जाने वाले 71 मेलों के आयोजन में होगा। राष्ट्रीय स्तर के मेले को अब दो लाख, राज्यस्तरीय मेले को 50 हजार और जिलास्तरीय मेले को 30 हजार रुपये की मदद दी जाएगी।
भाषा एवं संस्कृति सचिव अनुराधा ठाकुर ने इसकी अधिसूचना बुधवार को लागू कर ली है। राज्य में राष्ट्रीय स्तर के मेलों की कुल संख्या नौ है। इनमें मंडी का शिवरात्रि, शिमला का ग्रीष्मोत्सव, चंबा का मिंजर, कुल्लू का दशहरा, रामपुर का लवी, सुजानपुर का होली मेला, सिरमौर का लवी, मनाली का विंटर कार्निवाल और कांगड़ा का मसरूर मेला प्रमुख हैं।
इनकी ग्रांट-इन-एड पहले एक लाख रुपये थी, मगर अब ये एक लाख रुपये और बढ़ा दी गई है।
इन 19 राज्यस्तरीय मेलों के आयोजन पर मिलेगा 50 हजार
इसी तरह से हिमाचल में राज्यस्तरीय मेलों की संख्या 19 हैं। इनमें से 13 मेले गैर- जनजातीय क्षेत्रों और छह जनजातीय क्षेत्रों में आयोजित किए जाते हैं। जिला स्तर के प्रमुख मेलों में बिलासपुर का नलवाड़ मेला, रोहडू़ का रोहडू़ मेला, धर्मशाला का ग्रीष्मोत्सव, सोलन का शूलिनी मेला, काजा का लदरचा मेला, केलांग का जनजातीय उत्सव, चंबा का मणिमहेश मेला, हमीरपुर का हमीर उत्सव आदि प्रमुख मेले हैं।
इन्हें अब तक 50 हजार रुपये की आर्थिक मदद मिलती थी, मगर अब ये एक लाख रुपये कर दी गई है। हिमाचल में जिलास्तरीय मेलों की संख्या 43 हैं। इनमें भी छह मेले जनजातीय क्षेत्रों में आयोजित किए जाते हैं। जिलास्तरीय प्रमुख मेलों में करसोग का नलवाड़ मेला, ज्वाली का बैशाखी मेला, आनी का आनी मेला, सराहन का दशहरा उत्सव, बागथन का बाल दिवस आदि हैं।
इन्हें पहले 15 हजार रुपये की ग्रांट मिलती थी, मगर अब ये 30 हजार रुपये की गई है। मेलों की ग्रांट-इन-एड बढ़ाने की व्यवस्था एक अप्रैल 2016 से लागू मानी जाएगी।