केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर सीबीआई को सेवाएं देने के बाद प्रदेश लौटे डीआईजी आसिफ जलाल को करीब ढाई महीने बाद आखिरकार सरकार ने तैनाती दे दी। आसिफ अब डीआईजी सीआईडी क्राइम के तौर पर अपनी सेवाएं देंगे।
वहीं, एसपी कांगड़ा के पद से सिरमौर तबादला होने पर दस दिन तक रिलीव न होने के बाद चर्चा में आए एचपीएस संजीव गांधी पर सरकार एक बार फिर मेहरबान दिखी। सरकार ने एसपी बद्दी के तौर पर किए उनके तबादले में बदलाव कर उन्हें एसपी ऊना लगा दिया है।
वहीं, एसपी ऊना बने अजय बोध को दो दिन बाद ही सरकार ने हटाकर कमांडेंट होमगार्ड बिलासपुर लगा दिया है। संजीव पर सरकार की यह मेहरबानी पुलिस से लेकर प्रशासनिक गलियारों में खासी चर्चा का विषय बन गई है।
दरअसल, करीब पंद्रह दिन पहले सरकार ने सूबे के सबसे बड़े जिले के पुलिस अधीक्षक रहे एचपीएस संजीव गांधी का तबादला सिरमौर कर दिया था। दस दिन तक न तो वह कांगड़ा से रिलीव हुए और न ही सरकार ने इस पर कोई संज्ञान लिया।
वहीं, दस दिन बाद दोबारा जब नई सूची जारी हुई तो संजीव का तबादला बद्दी कर दिया गया। हालांकि तबादले के दो दिन बाद भी वह रिलीव नहीं हुए। अब उनका तबादला सरकार ने ऊना कर दिया है।
शिमला रेंज का पद खाली
गुड़िया प्रकरण के बाद जिस तरह हालात बदले, उसके बाद भी सरकार विवाद से निपटने के लिए कारगर रणनीति नहीं बना पाई। राजधानी शिमला में भले ही कानून व्यवस्था बड़ी चुनौती हो लेकिन सरकार के लिए यह गंभीर मुद्दा नहीं है।
शायद यही कारण है कि आईजी जहूर जैदी को हटाने के बाद से अब तक सरकार नए आईजी या डीआईजी की तैनाती नहीं कर सकी है। डीडब्ल्यू नेगी को हटाकर नए एसपी के तौर पर सौम्या सांबशिवन की तैनाती तो कर दी लेकिन जिले में खाली चल रहे दो एडिशनल एसपी और एक सीओ के पद पर तैनाती नहीं कर सकी।
यह तब है जब पूरे शिमला में लगातार कानून व्यवस्था एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। सूत्रों का कहना है कि कुछ काबिल अफसरों को सरकार नहीं लाना चाह रही जबकि कई ऐसे हैं जो चर्चा होने पर ही शिमला में तैनाती रुकवाने के लिए लॉबिंग में जुटे हैं। इसके पीछे गुड़िया प्रकरण और चुनाव बड़ी वजह है।