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कैबिनेट के बड़े फैसले: खुला नौकरियों का पिटारा, बंद होंगे छोटे स्कूल

Thu, 05 Jan 2017 09:46 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में बुधवार को सरकार ने फिर नौकरियों का पिटारा खोल दिया है। विभिन्न विभागों में अलग-अलग श्रेणी के करीब 135 पदों को सृजित करने और भरने की मंजूरी प्रदान की गई।
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मीटिंग के दौरान परिवहन विभाग में चपरासी के पांच पद के अलावा जूनियर आफिस असिस्टेंट (आईटी) के बीस पद और एलडीआर के माध्यम से क्लर्क के पांच पदों को भरने की मंजूरी दी। इसके अलावा ऑफिस इंचार्ज कम सुपरिंटेंडेंट के 12 पदों को जूनियर ऑफिस असिस्टेंट पद में बदलने और लेबर वेलफेयर ऑफिसर के 12 पद सृजित कर भरने की मंजूरी दी गई।

वहीं, कैबिनेट ने एचपी बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर्स वेलफेयर बोर्ड में डाटा एंट्री ऑपरेटर के चार पद, चौकीदार के चार, सफाई कर्मी के चार पद, श्रम विभाग के विभिन्न कार्यालयों में आउटसोर्स आधार पर 36 सफाई कर्मी रखने और शिमला व धर्मशाला स्थित लेबर कोर्ट में दो चपरासी रखने को भी अपनी रजामंदी दे दी।
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यहां भी होगी सरकारी नौकरियों में भर्ती

आईटी डिपार्टमेंट में पर्सनल असिस्टेंट के एक पद, स्टेट रिसोर्स सेंट फार वूमेन में सहायक स्टाफ के चार पद, आईसीएसए सुंदरनगर में म्यूजिक टीचर के एक पद सृजित करने और बागवानी विभाग में स्किल्ड ग्राफ्टर के 18 पदों को भरने की भी मंजूरी प्रदान की।

शिमला के जुब्बल में खुलेगा नया पीएचसी
कैबिनेट ने शिमला जिले की जुब्बल तहसील के खड़ा पत्थर और भोलर में पीएचसी खोलने को मंजूरी दे दी। इसके साथ ही यहां एक मेडिकल अफसर, फार्मासिस्ट और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद सृजित करने की मंजूरी दे दी।

वहीं, आयुर्वेद विभाग में सीनियर असिस्टेंट के तीन पद सृजित करने के अलावा जूनियर ऑफिस असिस्टेंट के तीन पद और लॉ अफसर के एक पद को भी सृजित कर भरने की भी मंजूरी दी।

कैबिनेट का फैसला, जिन स्कूलों में कम छात्र, वो भी होंगे बंद

पांच छात्रों से कम संख्या वाले 99 प्राइमरी स्कूल बंद करने के बाद अब सरकार 10 विद्यार्थियों से कम संख्या वाले स्कूलों को बंद करने की तैयारी में है। बुधवार को राज्य सचिवालय में हुई कैबिनेट बैठक में पहली से पांचवीं कक्षा तक के 10 विद्यार्थियों से कम संख्या वाले स्कूलों का सर्वे करने का फैसला लिया गया है।

प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय को सर्वे करने के सरकार ने आदेश दिए हैं। शिक्षा का ढांचा सुदृढ़ करने के लिए सरकार ने यह फैसला लिया है। बुधवार को कैबिनेट बैठक में 5 विद्यार्थियों से कम संख्या वाले 99 स्कूलों को नवंबर महीने की बैठक में बंद करने के फैसले की समीक्षा की गई।

इस दौरान मंत्रिमंडल ने 10 विद्यार्थियों से कम संख्या वाले स्कूलों को भी बंद करने की पैरवी की। इस पर फैसला लिया गया कि पहले ऐसे स्कूलों का सर्वे करवाया जाएगा। इन स्कूलों के नजदीक अगर कोई और स्कूल नहीं होगा तो इन्हें बंद नहीं किया जाएगा।

अगर आसपास स्कूलों की सुविधा होगी तो उन्हें बंद किया जा सकता है। स्कूल बंद करने के लिए सरकार ने क्राइटेरिया फिक्स किया है। सिर्फ डेढ़ किलोमीटर के दायरे में आने वाले प्राइमरी स्कूलों को ही बंद कर अन्य स्कूलों में मर्ज किया जाएगा।

200 स्कूल हो सकते हैं बंद, इसलिए लेना पड़ा फैसला

इन स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों को डेढ़ किलोमीटर के भीतर दूसरे स्कूल में भेजा जाएगा। इससे ज्यादा दूरी वाले स्कूल पहले की तरह चलते रहेंगे। इनमें चाहे छात्रों की संख्या कम ही क्यों न हो। कम स्कूल में तैनात अध्यापकों को उन स्कूलों में भेजा जाएगा।

जहां स्टाफ की भारी किल्लत होगी। हिमाचल सरकार ने चार वर्षों के भीतर प्रदेश में सैकड़ों नए स्कूल खोले हैं। लेकिन इन स्कूलों में पढ़ने वालों की संख्या बढ़ नहीं रही है। ऐसे में कैबिनेट ने कम संख्या वाले स्कूलों का सर्वे करवाने का फैसला लिया है।

10 छात्रों से कम संख्या वाले सूबे में 200 स्कूल
हिमाचल में दस छात्रों से कम संख्या वाले करीब 200 स्कूल हैं। ऐसे स्कूलों पर प्रतिवर्ष सरकार को लाखों रुपये का खर्च वहन करना पड़ रहा है। इन स्कूलों को अगर बंद किया जाता है तो एक ओर जहां सरकारी खर्च कम होगा वहीं अन्य स्कूलों में रिक्त चल रहे शिक्षकों के पद भी भरे जा सकेंगे। सरकार के इस फैसले से शिक्षा में गुणवत्ता भी आएगी।

बैंटनी कैसल का अधिग्रहण करेगी सरकार

राज्य मंत्रिमंडल की बुधवार को हुई बैठक में समझौता समिति की मंजूरी पर शिमला स्थित कालीबाड़ी मंदिर के समीप बहुचर्चित बैंटनी कैसल की पूरी जमीन का अधिग्रहण करने का फैसला भी लिया गया है।

समझौता समिति की सिफारिश पर जमीन के मालिक को 27.84 करोड़ रुपये की राशि की अदायगी करने को भी मंजूरी दी गई। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि बैंटनी कैसल के पुराने भवन का जीर्णोद्धार कर यहां एक संग्रहालय स्थापित किया जाएगा।

इस क्षेत्र में एक मनोरंजन पार्क और रेस्तरां भी विकसित किया जाएगा। ये पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र होगा। वहीं, राज्य मंत्रिमंडल ने विभिन्न विभागों में 135 पदों को भरने को भी मंजूरी दी।

भूमि अधिग्रहण को लेकर भी लिया गया बड़ा फैसला

प्रदेश में भूमि अधिग्रहण को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद के बीच राज्य सरकार के मंत्रिमंडल ने बुधवार को बैठक में अहम फैसला लिया। कैबिनेट ने हिमाचल प्रदेश निष्पक्ष एवं मुआवजा तथा भूमि अधिग्रहण में पारदर्शिता, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन (मुआवजा पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन एवं विकास योजना) अधिकार नियम 2016 बनाने को स्वीकृति प्रदान की।

हालांकि केंद्र में पूर्व में रही यूपीए सरकार के दौरान यह कानून 2013 में पारित हुआ था लेकिन प्रदेश में तब से अब तक प्रदेश सरकार इस एक्ट के रूल्स नहीं बना सकी थी। हालांकि इन रूल्स के बनने के बाद भी प्रदेश में भूमि अधिग्रहण को लेकर चल रहे विवाद के खत्म होने के आसार नहीं है।

भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रहे लोगों का नेतृत्व कर रहे रिटायर्ड बिग्रेडियर खुशाल ठाकुर ने कहा कि सिर्फ रूल्स बनाने के लिए मंजूरी देने में सरकार को तीन साल लग गए। इससे प्रदेश सरकार की कार्यशैली उजागर होती है। कहा कि सरकार रूल्स बनाने के बाद भी जब तक एक्ट को सही तरीके से प्रदेश में लागू नहीं करती और लोगों को उनकी भूमि का उचित मुआवजा नहीं देती तब तक भूमि अधिग्रहण को लेकर विवाद खत्म नहीं हो सकता।

11 साल से लटके बागछाल पुल बनाने को कैबिनेट की मंजूरी

मंत्रिमंडल ने बिलासपुर जिला के गोबिंद सागर पर निर्माणाधीन और सालों से लंबित 317.50 मीटर लंबे बागछाल पुल के निर्माण को स्वीकृति दी है। यह पुल गेहड़वी तथा कोट-कहलूर विधानसभाओं को जोड़ेगा। इस पुल का निर्माण होने से स्वारघाट नदी किनारे के 14 गांवों के 14 हजार लोगों तथा दूसरी तरफ  शाहतलाई की ओर रहने वाले 19 गांवों के 20 हजार लोग लाभान्वित होंगे।

‘अमर उजाला’ ने 26 दिसंबर को 11 साल में बने सिर्फ दो पिलर, मजाक बन गया बागछाल पुल शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मंत्रिमंडल में इस पुल को बनाने की मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने 2005 में इस पुल का शिलान्यास किया था। इसके बाद लोक निर्माण विभाग ने औपचारिकताएं पूरी करके इस पुल को बनाने का काम शुरू किया था।

लेकिन, दो पिलर ही खड़े हो पाए। उसके बाद से इसका काम रुका पड़ा था। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि इस पुल को कहीं शिफ्ट नहीं किया जाएगा। जहां पर पहले से काम हुआ है, उसी स्थान पर पुल बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि जहां पर पुल बनाया जा रहा है, वहां डेंजर जोन नहीं है।  

 

झंडूता से बिलासपुर की दूरी 30 किमी रह जाएगी

बागछाल पुल बनने से झंडूता से बिलासपुर की दूरी 30 किलोमीटर कम होगी। पुल न बनने से लोगों को करीब 100 किलोमीटर अतिरिक्त सफर करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों में इस पुल के न बनने से काफी रोष था।

हाईकोर्ट ने दिए थे 1 साल में पुल बनाने के निर्देश
बिलासपुर, सोलन और हमीरपुर तीन जिलों को जोड़ने वाले इस पुल पर 18.46 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। 11 साल पहले इस पुल का निर्माण कार्य शुरू हुआ था। समय रहते पुल न बनने से लोगों ने हाईकोर्ट की भी शरण ली। कोर्ट ने 1 साल के भीतर इस पुल को बनाने के निर्देश दिए। अब सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते बुधवार को मंत्रिमंडल की बैठक में इसे मंजूरी दी है।

हिमाचल मंत्रिमंडल की बैठक में ये भी हुए निर्णय

हिमाचल मंत्रिमंडल ने चूना पत्थर और फ्लाई ऐश पर लगने वाले एजीटी कर की दरों का भी युक्तिकरण किया है। ये निर्मित उत्पादों के लिए प्रमुख कच्चा माल है। इसमें दरों को मुख्यमंत्री की बजट घोषणा के अनुरूप 25 प्रतिशत कर दिया गया है।

इससे उद्योगों को दोहरे कर से राहत मिलेगी, जिसमें कच्चे माल को लाने और निर्मित उत्पाद को ले जाने के लिए कर देना पड़ता है। इसके अलावा हिमाचल मंत्रिमंडल ने जयसी 528 मेगावाट एचईपी को सतलुज जल विद्युत निगम को आवंटित करने का निर्णय लिया गया। इसे सुन्नी बांध से नामित किया गया है।

बुधवार को मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में शिमला ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र के तहत सुन्नी के उपमोहाल जंगल मेहदूधजा कौनपुर में बस अड्डे के निर्माण के लिए सरकारी भूमि राज्य सिटी ट्रांसपोर्ट बस अड्डा प्राधिकरण के पक्ष में पट्टे पर करने की मंजूरी भी दी गई।
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मंत्रिमंडल की बैठक में ये भी हुए निर्णय

रक्कड़ में अस्थायी पुलिस चौकी को पुलिस थाना में स्तरोन्नत करने का भी फैसला लिया गया। नूरपुर के सुलयाली में पीडब्ल्यूडी के नए विश्राम गृह के निर्माण को भी मंजूरी दी गई। सीएम वीरभद्र सिंह की घोषणा के अनुरूप सिरमौर जिला के पराड़ा स्थित पशु औषधालय को स्तरोन्नत कर पशु अस्पताल बनाने का निर्णय भी मंत्रिमंडल में लिया गया।

शिमला जिले की जुब्बल तहसील के भठाड़ गलू, मंडी जिले के थुनाग तहसील के कंडी, किन्नौर जिले की मुरंग तहसील के रिब्बा, सांगला तहसील के कड़छम और पूह तहसील के नामुंगिया में नए पटवारवृत्तों के सृजन के साथ पटवारियों के पदों के सृजन को भी मंजूरी दी।

 
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