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कांग्रेस महासचिव ने अपने ही MLA पर लगाया 200 करोड़ घोटाले का आरोप

Tue, 09 May 2017 12:07 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बिलासपुर
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हिमाचल कांग्रेस महासचिव रामलाल ठाकुर
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हिमाचल प्रदेश कांग्रेस महासचिव रामलाल ठाकुर ने अपनी ही पार्टी के विधायक के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने बिलासपुर सदर के विधायक बंबर ठाकुर पर 200 करोड़ के घोटाले के गंभीर आरोप लगाए हैं। पंजाब के तस्करों से भी रिश्ता होने की बात कही है।
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रामलाल ने विधायक पर फोरलेन हाईवे के अधिकारी से एक लाख रुपये कमीशन लेने का आरोप भी लगाया। कहा कि विधायक खैर कटान से लेकर अवैध खनन जैसे कार्यों में संलिप्त हैं। इसके उनके पास पूरे साक्ष्य हैं। रामलाल ठाकुर ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से मामले की जांच सीबीआई से करवाने की मांग की है।
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बोले- चार साल में सरकार को 200 करोड़ का चूना लगाया

उन्होंने सवाल उठाया कि बिलासपुर में क्वारी (तय माइनिंग क्षेत्र) नहीं है। बावजूद इसके फोरलेन के लिए रेत-बजरी और पत्थर कहां से आ रहा है? इसके एम फार्म किसके नाम से कटे हैं? सरकार इसकी जांच करवाए। सदर के नेता ने चार साल में सरकार को 200 करोड़ का चूना लगाया है। उन्होंने विधायक को नसीहत दी कि वे कुछ बोलने से पहले अपनी पृष्ठभूमि को देख लें कि वे पहले क्या थे।


रामलाल ठाकुर विधायक बंबर ठाकुर की ओर से उन पर लगाए आरोपों के जवाब में पत्रकार वार्ता के दौरान बोल रहे थे। कहा कि फोरलेन में लगे हाइवे (बड़े टिप्पर) कितने हैं? इसकी एवज में एक लाख कमीशन फोरलेन के अधिकारी, एक लाख सदर के नेता और 25 हजार की कमीशन बैंक के फील्ड अधिकारी के लिए थी। उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति के कारण पूरी पार्टी को नुकसान हो, उससे पहले सीएम को इस संबंध में कड़े कदम उठाने चाहिए।
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कहा- कोई बोले तो धमकाते हैं विधायक

बिलासपुर सदर के विधायक बंबर ठाकुर
रामलाल ठाकुर ने कहा कि विधायक की दादागीरी इतनी बढ़ गई है कि अगर कोई बोले तो उसे धमकाया जाता है या फिर तबादला कर दिया जाता है। पूर्व में महिला आरटीओ को धमकाने का मामला हो या फिर डीएफओ के साथ मारपीट का मामला, लोगों को सब पता है। पंजाब के तीन चार लोग खैर तस्करी में जुड़े हैं। कहा कि पंजाब के विधायक ने भी शिकायत की थी। ये लोग भाजपा से संबंध रखते है। हैरत है कि उनका दोस्ताना विधायक के साथ है।

डर के मारे कुछ नहीं बोल रहे अफसर
रामलाल ठाकुर बोले - कोठीपुरा में खैर की लकड़ी कटी थी तो उन्होंने प्लानिंग बोर्ड की बैठक में यह मुद्दा उठाया था। हैरत है कि एक ऐसे अधिकारी को यहां नियमों को ताक पर रखकर तैनात कर दिया, जिस पर पहले ही अवैध कटान कर जंगलों को जलाने के आरोप लग चुके थे। सभी विभागों के अधिकारी डर से कुछ नहीं बोल रहे हैं। सबसे अधिक गंभीर हालत पुलिस की है। उन्होंने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से मांग की है कि इन मामले की जांच सीबीआई से करवाई जाए।
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