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हिमाचल विधानसभा बजट सत्र: स्वास्थ्य विभाग में रिक्त पदों, उपकरणों की खरीद पर पक्ष-विपक्ष में नोकझोंक

Fri, 20 Mar 2026 10:11 AM IST
Ankesh Dogra अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

वीरवार को विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान पक्ष और विपक्ष के बीच जमकर नोकझोंक हुई। 
 
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हिमाचल विधानसभा शिमला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि अगले छह माह में हिमाचल प्रदेश के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) को डॉक्टर उपलब्ध करवाए जाएंगे। जरूरत के अनुसार पदों का युक्तिकरण भी होगा। वीरवार को विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आईजीएमसी और टांडा को छोड़कर सभी मेडिकल कॉलेज नाम के रह गए हैं।

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इनके पास फैकल्टी नहीं हैं। सरकार पीजी सीटों को डबल कर रही है। अगले छह महीनों में मेडिकल कॉलेजों को भी मजबूत करेंगे। एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति के नियम सरल कर रहे हैं। किसी मेडिकल कॉलेज को बंद नहीं किया जाएगा। एक साथ 400 डॉक्टरों की भर्ती पहली बार एकसाथ की जा रही है। सहायक प्रोफेसरों के भी 100 पद भरेंगे। स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल को विपक्ष से घिरता देखकर जवाब देने के लिए मुख्यमंत्री खुद खड़े हो गए।

सदन में भाजपा विधायक राकेश जम्वाल ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री की ओर से जो जवाब दिया गया है, उसके अनुसार सरकार के पास बेरोजगार डॉक्टरों का आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने भी बेरोजगार डॉक्टरों का आंकड़ा न होने पर सवाल खड़ा किया। इससे पहले स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में चिकित्सकों के 2337 और विशेषज्ञ चिकित्सकों के 683 पद मंजूर हैं।

मेडिकल कॉलेजों-अस्पतालों समेत एम्स चमियाना शिमला में एमबीबीएस डॉक्टरों के 81 और एमडी, एमएस एवं डीएनबी संकाय सदस्यों के 2060 पद मंजूर हैं। मेडिकल कॉलेजों में हर वर्ष 870 एमबीबीएस और 247 पीजी प्रशिक्षु पास ऑउट हो रहे हैं। पासऑउट होने के बाद इनमें से कुछ एमबीबीएस डॉक्टर एमडी, एमएस, डीएनबी और डिप्लोमा करते हैं और कुछ केंद्रीय व प्रदेश के संस्थानों एवं निजी क्षेत्र में नियुक्त होते हैं। सरकार ने 13 नवंबर 2025 को राज्य लोक सेवा आयोग को चिकित्सकों के 232 पद भरने के बारे में मांग पत्र भेजा था। जहां तक बेरोजगार चिकित्सकों की संख्या का प्रश्न है, इस बारे में कोई ब्योरा उपलब्ध नहीं हैं।

सीएम ने कहा-तीन हजार करोड़ के उपकरण खरीद रहे
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार 3000 करोड़ रुपये के मेडिकल उपकरणों ए क्लास कंपनियों से खरीद रही है। जवाब दिया कि दुनिया की ए क्लास कंपनियों से खरीद की जा रही है। मशीनें पारदर्शिता के साथ खरीदी गई हैं। प्रश्नकाल में विधायक केवल सिंह पठानिया ने टांडा मेडिकल कॉलेज में मशीनरी के लिए स्वीकृत राशि और उसमें से विभिन्न मशीनों पर किए गए खर्च का ब्योरा मांगा। पठानिया ने कहा कि टांडा मेडिकल कॉलेज में रोबोटिक सर्जरी की शुरुआत एक बड़ी उपलब्धि है, जिसे आम आदमी ने पहले सोचा भी नहीं था। वहीं, विधायक विपिन सिंह परमार ने अनुपूरक प्रश्न में पूछा कि रोबोटिक सर्जरी शुरू होने के बाद अब तक कितने ऑपरेशन हुए, इस पर कितना खर्च आया, क्या यह आयुष्मान और हिमकेयर योजना के तहत कवर है, मशीनें किस कंपनी की हैं और क्या खरीद में टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई। सुक्खू ने जवाब में कहा कि सरकार मेडिकल कॉलेजों को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।

जयराम का आरोप : आउटसोर्स भर्ती के लिए लिया जा रहा पैसा 
प्रश्नकाल के दौरान विधायक दीपराज ने आउटसोर्स कर्मचारियों को नौकरी से निकाले जाने का मामला उठाया। सीएम सुक्खू ने कहा कि इस बारे में जल्दी सूचना एकत्र कर सदन में रखी जाएगी। इस पर नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने अनुपूरक प्रश्न करते हुए पलटवार किया कि सूचना नहीं देने से कब तक बचोगे। कहां-कहां बचोगे। आउटसोर्स पर लगे 15 हजार कर्मचारियों को निकाल दिया गया। जो बचे हैं, उन्हें तनख्वाह छह-छह महीनों के बाद भी नहीं दी जा रही है।

क्या समय पर वेतन देना सुनिश्चित करेंगे। वादा नौकरियां देने का किया गया था। आउटसोर्स पर नौकरियां देने वाली सारी एजेंसियां कांग्रेस नेताओं के नाम पर हैं। क्या आउटसोर्स पर नियुक्त करने से पहले पैसा लिया जा रहा है। ऐसी जानकारी क्या मुख्यमंत्री को है। इस पर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने जवाब दिया कि अगर समय पर भुगतान नहीं करने की जानकारी है तो बता दें। इस पर कार्रवाई करेंगे। अगर कहीं पैसे लिए जा रहे हैं तो उसकी भी सूचना दें। वरना सूचना सही नहीं हुई तो उनके खिलाफ विशेषाधिकार का मामला बनेगा। सरकार हर कार्रवाई को तैयार है।

पूछा: पढ़ाई के बाद कितने डॉक्टर बेरोजगार : जयराम ने कहा कि जब वह सीएम थे तो 700 बच्चे नौकरी की तलाश कर रहे थे। 500 पद एक साथ निकाले गए। 500 में से 300 पद भरे गए। बाद में चुनाव आए तो इस सरकार ने 200 पदों पर समय पर भर्ती नहीं की। इसके लिए ढाई साल लगा दिए। सरकार के पास यह आंकड़ा भी नहीं है कि बेरोजगार डॉक्टर कितने हैं।  इस पर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि 200 पद पहले मंजूर किए। 236 के और इंटरव्यू करवा रहे हैं। सीएम ने व्यंग्य के लहजे में कहा कि देश में बेरोजगार डॉक्टरों की पहले नड्डा से जानकारी जुटाएंगे और उसके बाद ही उन्हें जानकारी देंगे। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर की ओर इशारा कर कहा कि वह इनकी गुस्से की भावना को समझते हैं। इनके लिए पानी के गिलास में बर्फ डालकर रखें।

हिमकेयर, सहारा योजनाओं के लिए 657 करोड़ रुपये
अनुपूरक बजट में हिमकेयर, सहारा योजना, चिकित्सा निकासी योजनाओं के लिए भी बजट रखा गया है। शिमला, टांडा, हमीरपुर, नेरचौक और एम्स चम्याणा में रोबोटिक सर्जरी, टांडा, हमीरपुर और एम्स चम्याणा में उन्नत परीक्षण प्रयोगशाला की स्थापना, हमीरपुर और टांडा के लिए पैट स्कैन की खरीद आदि के लिए 657.22 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

443.33 करोड़ हिमाचल पथ परिवहन निगम को सहायता अनुदान के लिए किया गया। सामुदायिक केंद्रों के निर्माण, 244.31 करोड़ स्कूल भवनों, राजकीय बहुतकनीकी कॉलेज सुलह, राजीव गांधी राजकीय अभियांत्रिकी कॉलेज और आईटीआई नगरोटा बगवां में भवनों तथा नादौन हमीरपुर, नाहन, बैजनाथ, कल्पा में इंडोर स्टेडियमों के निर्माण, 221.53 करोड़ आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं के मानदेय, मुख्यमंत्री सुख आश्रय कोष, मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना, मुख्यमंत्री सुख शिक्षा योजना, लुथान कांगड़ा में सुख आश्रय परिसर एवं विभिन्न जिलों में शिशु देखभाल केंद्रों के निर्माण और पेंशनरों की चिकित्सा प्रतिपूर्ति, 192.20 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

एनडीआरएफ बटालियन मुख्यालय बैहना मंडी के लिए सड़क निर्माण, मशीनरी और उपकरणों की खरीद व 186.73 करोड़ राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय घंडल में न्यायिक अवसंरचना के उन्नयन, छात्रा छात्रावास, राजस्व भवनों, जेल भवनों, राज्य के विभिन्न स्थानों पर कार्यालय भवन, नई दिल्ली स्थित द्वारका में राज्य अतिथि गृह और हिमाचल भवन चंडीगढ़ के निर्माण के लिए किया गया।

अन्य विभागों को : शहरी विकास 520.38 90.00, ग्रामीण विकास 563.59 2.27, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता 147.56 109.50, सिंचाई एवं जलापूर्ति 489.52 475.19, उद्योग विभाग 131.32 16.22, विद्युत विकास 1154.50 3042.75, सड़क एवं परिवहन 250.72 96.89 करोड़।
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26,194.95 करोड़ वेज एंड मींस, ओवरड्राफ्ट को
पेश किए 40,461.95 करोड़ के अनुपूरक बजट में 36,374.61 करोड़ राज्य स्कीमों और 4087.34 करोड़ केंद्रीय प्रायोजित स्कीमों के लिए रखे गए हैं। राज्य की स्कीमों में मुख्य रूप से 26,194.95 करोड़ रुपये वेज एंड मींस और ओवरड्राफ्ट के लिए प्रावधान किया गया। 4150.14 करोड़ रुपये का प्रावधान उपदान और बिजली को उदय योजना के तहत उपलब्ध करवाए गए ऋण को इक्विटी में बदलने, क्षतिग्रस्त ट्रांसफार्मरों की मरम्मत, 818.20 करोड़ प्राकृतिक आपदा राहत, 785.22 करोड़ जलापूर्ति एवं मल निकासी योजनाओं के लिए है। केंद्रीय प्रायोजित स्कीमों के तहत अधिकतर राशि का चालू और नई विकास योजनाओं के लिए प्रावधान किया गया है। 2,453.97 करोड़ एनडीआरएफ से प्राप्त आपदा प्रबंधन, 688.40 करोड़ का प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना, 352.18 करोड़ रेणुकाजी बांध विस्थापितों को मुआवजा देने का प्रावधान भी किया गया है। 
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