कार्ड पर 30 हजार का पैकेज है निर्धारित, दवाएं नहीं मिल रही
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आईजीएमसी में ऑपरेशन करवाने वाले मरीज झेल रहे परेशानी
सरकारी योजनाओं के लाभ से भी मरीज हो रहे हैं वंचित अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। सरकार की ओर से अस्पतालों में चलाई जा रही हिमकेयर योजना का कार्ड होने के बाद भी मरीजों को जेब से पैसा खर्च करना पड़ रहा है। पित्त की पथरी के ऑपरेशन के लिए 30 हजार रुपये का पैकेज निर्धारित है, फिर भी मरीजों को हजारों रुपये की दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं। इससे ऑपरेशन करवाने वाले मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और उनकी जेब पर भी अतिरिक्त बोझ बढ़ रहा है।
इसके साथ ही मरीज सरकारी योजनाओं के लाभ से भी वंचित रह रहे हैं। प्रदेश के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) में मरीजों को इस प्रकार की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस समस्या का समाधान निकालने के लिए मरीज कई बार सरकार और अस्पताल प्रबंधन से मिल चुके हैं, लेकिन कोई फायदा नहीं हो रहा है। इससे वार्ड में भर्ती होने वाले मरीजों को अधिकतर दवाएं लेने के लिए निजी दवा दुकानों का रुख करना पड़ रहा है। आईजीएमसी का सरकार की ओर से हिमकेयर योजना के तहत लाखों रुपये का भुगतान भी लंबित है। इस कारण वेंडर कई प्रकार का सामान और दवाएं उपलब्ध नहीं करवा पा रहे हैं। जन औषधि केंद्रों से भी मरीजों को दवाएं नहीं मिल रही हैं, लेकिन इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। मरीजों और तीमारदारों ने हिमकेयर योजना को और बेहतर करने की मांग की है। गौरतलब है कि हिमकेयर योजना के तहत मरीजों को पांच लाख तक के मुफ्त उपचार की सुविधा मुहैया करवा रखी है।
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केस स्टडी-1 रोहड़ू के सुल्तान ने बताया कि उनकी पत्नी को पित्त की पथरी के ऑपरेशन के लिए शनिवार (19 सितंबर) शाम को भर्ती किया गया। इसके बाद उन्हें हिमकेयर कार्ड एक्टिव करवाने के लिए कहा गया। कार्ड एक्टिव करवाने के बाद पहले तो कुछ दवाएं अस्पताल के भीतर से मिल गईं लेकिन रविवार और सोमवार को दवाओं के लिए निजी दवा दुकानों का रुख करना पड़ा। यहां से पहले 2,350 रुपये और इसके बाद फिर 2,300 रुपये की दवाएं बाहर से लानी पड़ीं।
केस स्टडी-2 करसोग से आईजीएमसी में ऑपरेशन करवाने आईं भीमा ने बताया कि हिमकेयर कार्ड का उन्हें कम फायदा मिला है। भर्ती होने के बाद 5,000 से 7,000 रुपये की दवाएं बाहर से मंगवानी पड़ीं। इससे जेब पर भी काफी बोझ बढ़ा है। सरकार की ओर से हिमकेयर कार्ड पर पांच लाख रुपये तक के मुफ्त उपचार का दावा किया जाता है, लेकिन ऑपरेशन के दौरान असल स्थिति का पता लग जाता है।
कोट हिमकेयर में मरीजों को दवाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं। कुछेक दवाओं की खरीदारी की जा रही है। आगामी दिनों में यह दवाएं भी मरीजों को मिलनी शुरू हो जाएंगी। -डॉ. शिल्पा, एमओ, एनएचएम