हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक ट्रिब्यूनल पर एक बार फिर खतरा मंडराने लगा है। प्रदेश सरकार में ट्रिब्यूनल को बंद करने को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। दरअसल, सरकार का एक धड़ा ट्रिब्यूनल को बंद करने के पक्ष में है। जबकि दूसरा धड़ा इसे चलाने में काई ऐतराज नहीं जता रहा। चूंकि ट्रिब्यूनल को बंद करने को लेकर पिछली भाजपा सरकार व नेताओं का रुख सख्त रहा है।
ऐसे में वर्तमान सरकार पर ट्रिब्यूनल को लेकर भारी दबाव है। सरकार के सूत्रों के अनुसार वीरभद्र सरकार ने इसे शुरू किया था लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल समेत भाजपा के कई नेताओं ने इस ट्रिब्यूनल को बंद करने की बात कही थी।
चूंकि वर्तमान में ट्रिब्यूनल में दो पदों को भरने को लेकर सरकार ने प्रक्रिया शुरू की थी जिसके बाद मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव डा श्रीकांत बाल्दी और अतिरिक्त मुख्य सचिव मनीषा नंदा का नाम तय माना जा रहा है। हालांकि फाइल अभी भी केंद्र को नहीं भेजी गई है। ऐसे में ट्रिब्यूनल के भविष्य को लेकर गेंद सरकार के पाले में ही है।