प्रार्थियों की ओर से कोर्ट में कहा गया कि भेदभावपूर्ण तरीके से उन्हें दाखिले से बाहर किया जा रहा है। सरकार ने ऐसा कोई सर्वे नहीं किया है, जिसके तहत उनकी श्रेणी को संवैधानिक तौर पर दाखिले से वंचित किया जा सके।
गौर हो कि सरकार ने बाहरी राज्यों से पढ़ाई करने वाले हिमाचली छात्रों को दो श्रेणियों में बांटा है। पहली श्रेणी में वे छात्र हैं, जिनके अभिभावक बाहरी राज्यों अथवा केंद्र सरकार सहित सरकारी उपक्रमों के अधीन नौकरी में हैं या कभी रहे थे।
दूसरी श्रेणी में वे छात्र हैं, जिनके अभिभावक निजी क्षेत्र में कार्यरत हैं या कभी रहे थे। सरकार ने मौजूदा सत्र में पहली श्रेणी के छात्रों को शर्त से छूट दी लेकिन दूसरी श्रेणी के छात्रों को लाभ नहीं दिया।
दूसरी श्रेणी के साथ संविधान के तहत भेदभाव हो रहा है या नहीं, इस पर खंडपीठ में सुनवाई कर रहे दोनों न्यायाधीशों में मतांतर पाया गया। न्यायाधीश धर्म चंद चौधरी और न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर की खंडपीठ नेमामला तीसरे जज कोभेजा। न्यायाधीश संदीप शर्मा ने अपने निर्णय में न्यायाधीश विवेक ठाकुर के निर्णय से सहमति जताई।