उत्पादकों ने सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की। बोनोफाइड हिमाचली हाइड्रो पावर डेवलेपर्स के अध्यक्ष राजेश शर्मा और महासचिव हेम सिंह ठाकुर ने बताया कि प्रदेश में छोटे बिजली प्रोजेक्ट लगाने की लागत बढ़ गई है जबकि कैपिटल कॉस्ट कम आंकी जा रही है।
दूसरे राज्यों के मुकाबले हिमाचल में टैरिफ रेट कम मिल रहा है। प्रदेश में करीब 650 बिजली प्रोजेक्ट विभिन्न मंजूरियां नहीं मिलने के चलते शुरू नहीं हो पा रहे हैं। इनमें पांच मेगावाट तक के 596 और 25 मेगावाट तक के 50 से अधिक प्रोजेक्ट शामिल हैं।
उन्होंने मांग करते हुए कहा कि सौ किलोवाट तक के प्रोजेक्टों की डीपीआर नहीं बननी चाहिए। विभिन्न एनओसी में छूट मिलनी चाहिए। फारेस्ट क्लीयरेंस डीएफओ स्तर पर मिलनी चाहिए।
ऊर्जा निदेशक मानसी सहाय ठाकुर ने कहा कि उत्पादकों की सभी मांगों को प्रदेश सरकार से अवगत करवाया जाएगा। बोर्ड निदेशक सुदेश मोक्टा ने कहा कि उत्पादकों को बेहतर माहौल देने के लिए सरकार प्रयासरत है।
उत्पादकों ने बताया कि सरकार ने संशोधित ऊर्जा नीति में बिजली उत्पादन बढ़ाने के लिए कई संशोधन किए हैं लेकिन बिजली नियामक आयोग छूट देने को राजी नहीं है।
आयोग ने पहले साल 2021 के बाद छूट देने की बात कही। अब इसे घटाकर मार्च 2019 कर दिया है। छूट लागू नहीं होने से उत्पादकों में रोष है। बिजली उत्पादकों ने प्रदेश में नए प्रोजेक्ट लगाने के लिए सरकार से आवेदन करने के लिए ऑनलाइन पोर्टल बनाने की मांग की है।
उत्पादकों का कहना है कि समय की बचत के लिए इस पोर्टल के माध्यम से ही सभी दस्तावेज जमा होने चाहिए। संबंधित विभाग भी यहीं पर एनओसी जारी करे।