बाढ़ से राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बाल्ट में भी बाढ़ के कारण स्कूल की दीवार टूट गई। डीएवी स्कूल नेरचौक स्थित डडौर की चहारदीवारी भी ढह गई है। बैहना के पास एक निजी स्कूल फिनीक्स में भी सुकेती खड्ड का पानी घुसने से नुकसान हुआ है। भारी बारिश से नदी-नाले उफान पर हैं।
उधर, कांगड़ा जिले में ब्यास नदी में बने पौंग बांध के गेट खोलने पड़े। वहीं, मंडी-कुल्लू नेशनल हाईवे पर छह मील के पास, पठानकोट-मंडी 32 मील के पास दिनभर और पांवटा-शिलाई एनएच तीसरे दिन भी पूर्ण रूप से बाधित रहा। प्रदेश में 302 सड़कें भी बाधित चल रही हैं। 1,184 बिजली के ट्रांसफार्मर और 26 पेयजल योजनाएं भी ठप हैं।
कालका-शिमला एनएच छह घंटे बंद रहा। शनिवार सुबह 10:15 बजे वाहनों की आवाजाही शुरू हुई, लेकिन भूस्खलन का खतरा बरकरार है। रातभर भारी बारिश में सैकड़ों लोग परेशान रहे। निर्माणाधीन सरकाघाट-धर्मपुर भी बाधित रहा। मंडी के धर्मपुर में सोन खड्ड एक बार फिर उफान पर आने से खड्ड किनारे बने बस अड्डे से एचआरटीसी को बसें हटानी पड़ीं।
कुल्लू के मणिकर्ण के गोज गांव में पहाड़ी से पत्थर गिरने से गाड़ी चकनाचूर हो गई। हालांकि कोई जानी नुकसान नहीं हुआ है। राजधानी शिमला में विकासनगर से एसडीए कांप्लेक्स को जाने वाली सड़क ढह गई। सड़क का बड़ा हिस्सा पंथाघाटी की ओर जा रही मुख्य सड़क पर जा गिरा। इस कारण शनिवार दोपहर कुछ देर के लिए पंथाघाटी की ओर से जाने वाले वाहनों की आवाजाही भी ठप रही। वाहनों को छोटा शिमला से कसुम्पटी होकर भेजा गया।
प्रदेश में रविवार को भी भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी हुआ है। आठ जिलों मंडी, शिमला, कांगड़ा, चंबा, हमीरपुर, बिलासपुर, कुल्लू और सोलन कि लिए बाढ़ की चेतावनी जारी की गई है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार 16 अगस्त तक मौसम खराब बना रहने का पूर्वानुमान है। दो दिन में बिलासपुर और मंडी जिले में सबसे ज्यादा बादल बरसे हैं।