वहीं, सिरमौर जिले के सतौन में पहाड़ से मलबा गिरने से स्कूल जा रहा नौवीं का छात्र दब गया, जिसे बाइक वाले और स्थानीय लोगों ने बचाया। कुल्लू जिले के खनेरनाला में बादल फटने से रघुपुर घाटी की आठ पंचायतों का संपर्क उपमंडल व जिला मुख्यालय से कट गया है। दो पेयजल योजनाएं भी ध्वस्त हो गई हैं। सड़क के बहने से यहां कई गाड़ियां फंस गईं। मंडी जिले के सराज के छतरी में बारिश से लोगों को भारी नुकसान हुआ है।
सरकाघाट की पटड़ीघाट पंचायत में भी सड़क पर पहाड़ियों से पत्थर गिरने का क्रम जारी है। सरकाघाट, मंडी, धर्मपुर, सराज और नाचन में पिछले दिनों हुई बारिश के चलते कई मकानों को खतरा बना हुआ है। सरकाघाट की धनालग पंचायत में करीब दो दर्जन घरों के आंगन, डंगे गिर गए हैं। राजधानी शिमला में शनिवार अपराह्न 3:30 बजे बादल झमाझम बरसे। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने रविवार को भी भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। 11 अगस्त तक मौसम खराब बना रहने का पूर्वानुमान है।
हिमाचल प्रदेश में मानसून सीजन के दौरान पश्चिमी विक्षोभ के कमजोर होते ही बादल कम बरस रहे हैं। बीते एक सप्ताह के दौरान हिमाचल में सामान्य से 58 फीसदी कम बारिश हुई है। मानसून सीजन के दौरान 24 जून से में 31 जुलाई तक हुई 56 फीसदी बारिश अब घटकर 45 फीसदी पहुंच गई है। 29 जुलाई से चार अगस्त तक प्रदेश में 28 मिलीमीटर बारिश हुई। इस अवधि में 66 मिलीमीटर बारिश को सामान्य माना जाता है।
इस एक सप्ताह के दौरान शिमला जिले को छोड़कर बाकी जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज हुई। शिमला में सामान्य से 6 फीसदी अधिक बादल बरसे। बिलासपुर में सामान्य से 48, चंबा में 82, हमीरपुर में 75, कांगड़ा में 57, किन्नौर में 79, कुल्लू में 59, लाहौल-स्पीति में 95, मंडी में 27, सिरमौर में 57, सोलन में 31 और ऊना में 86 फीसदी कम बारिश रिकॉर्ड हुई। मानसून सीजन के दौरान 24 जून से पांच अगस्त तक प्रदेश में 589.9 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई है। इस अवधि में 405.5 मिलीमीटर बारिश को सामान्य माना जाता है।