प्रदेश में रविवार को भी भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी हुआ है। आठ जिलों मंडी, शिमला, कांगड़ा, चंबा, हमीरपुर, बिलासपुर, कुल्लू और सोलन कि लिए बाढ़ की चेतावनी जारी की गई है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार 16 अगस्त तक मौसम खराब बना रहने का पूर्वानुमान है। दो दिन में बिलासपुर और मंडी जिले में सबसे ज्यादा बादल बरसे हैं।
कालका-शिमला नेशनल हाईवे पर शनिवार सुबह दूध और ब्रेड की सप्लाई लेकर आ रहीं गाड़ियां भूस्खलन के कारण तय समय पर शिमला नहीं पहुंचीं। चक्कीमोड़ में सड़क बंद थी। इसके बाद वाहन वाया नाहन होकर शिमला पहुंचे। तारादेवी के समीप देर रात लैंड स्लाइड के कारण यहां पर भी गाड़ियां आधा घंटा फंसी रहीं।
शाम 5:00 बजे के बाद ही लोगों को दूध, ब्रेड और अन्य सामान मिल सका। चंडीगढ़ से दूध, ब्रेड और पनीर की सप्लाई रविवार को शिमला नहीं आएगी। शहर में वेरका दूध के सप्लायर गिरीश शर्मा ने बताया कि शनिवार को वाहन देरी से शिमला से रवाना हुए। अब सोमवार को ही लोगों को सप्लाई मिलेगी।
क्षेत्र बारिश मिलीमीटर में
मंडी 105
पालमपुर 102
धर्मशाला 87
कांगड़ा 81
शिमला 37
सोलन 35
शुक्रवार को चक्कीमोड़ के पास हाईवे बंद होने के बाद लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। इससे सैकड़ों वाहनों हाईवे पर फंसे रहे। उन्हें सड़क खुलने का सुबह तक इंतजार करना पड़ा। बारिश के बीच डर के साये में वाहन चालक खड़े रहे। सामने पहाड़ियां दरकता देख परेशान होते रहे। हाईवे बंद होने के बाद भूखे-प्यासे रहकर रात काटी।
कालका-शिमला नेशनल हाईवे-5 पर परवाणू से कुमारहट्टी में पहाड़ियां आफत बनकर ढह रही हैं। हालात यह है कि कब कहां से कोई पत्थर मुसीबत बनकर आ जाए इसके बारे में पता ही नहीं चलता। इसके चलते हाईवे पर कार, बस, ट्रक चालकों को गंतव्य तक पहुंचने के लिए जान जोखिम में डालनी पड़ रही है। इसके साथ पेशेवर समेत कामकाज के लिए जा रहे लोगों को भी हाईवे बंद होने के बाद पैदल चलने पर मजबूर होना पड़ रहा है। कालका-शिमला हाईवे पर चलना जोखिमपूर्ण बना हुआ है।