उधर, रिब्बा क्षेत्र के ओठंग नाले में वीरवार रात करीब तीन बजे अचानक बाढ़ आ गई। उफनते नाले ने रिब्बा से कंडे को जोड़ने वाली संपर्क सड़क को कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त कर दिया। सुबह ग्रामीणों ने देखा कि कई वाहन मलबे में टायर तक धंसे हुए थे। शुक्रवार को प्रदेश के अन्य हिस्सों में मौसम का मिला-जुला असर देखने को मिला। कांगड़ा जिले के धर्मशाला और आसपास के क्षेत्रों में दोपहर बाद तेज बारिश हुई, जबकि चंबा में सुबह से हल्की वर्षा का दौर चलता रहा। बाद में धूप निकलने से उमस बढ़ गई। मंडी में रात की बारिश से कुछ घरों में पानी चला गया। ऊना और हमीरपुर में बारिश नहीं होने से लोगों को उमस भरी गर्मी का सामना करना पड़ा। कुल्लू में मौसम सामान्य रहा, जबकि रोहतांग और चंद्राघाटी में रुक-रुक कर हुई बारिश से तापमान में गिरावट दर्ज की गई। लाहौल में जाहलमा नाले ने एक बार फिर लोगों की मुश्किलें बढ़ाईं। बीआरओ ने अस्थायी मार्ग को बड़े वाहनों के लिए बहाल कर दिया है, लेकिन स्थानीय लोगों और किसानों को अभी भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। राजधानी शिमला में दोपहर तक मौसम साफ रहा। शाम के समय शहर में बादल बरसे।
माैसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार 6, 7 और 8 जुलाई को राज्य के ज्यादातर इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। इस दाैरान कुछ जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। जबकि 3, 5 और 9 जुलाई को कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश होने के आसार हैं। इस दाैरान कुछ जगहों पर भारी बारिश हो सकती है। 4 जुलाई को कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।
6 जुलाई को कांगड़ा, सिरमाैर, मंडी व शिमला के लिए भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं 7 जुलाई के लिए हमीरपुर, कांगड़ा, मंडी, शिमला व सिरमाैर के लिए ऑरेंज अलर्ट है। अन्य कई जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है।
वहीं जून में हिमाचल प्रदेश में कई दिनों तक छिटपुट बारिश हुई। 1901 के बाद से जून में हिमाचल में यह 44वीं सबसे कम बारिश (64.9 मिमी) दर्ज की गई है। जबकि सबसे ज्यादा बारिश 1971 में (252.7 मिमी) हुई थी। 12 जून को सोलन जिले में और 29 जून को ऊना और मंडी जिलों में कुछ जगहों पर भारी बारिश दर्ज की गई।
नेरी 34.6
ऊना 34.5
मंडी 34.0
कांगड़ा 33.6
बरठीं 33.5
बिलासपुर 33.0
सोलन 31.5
नाहन 31.3
चंबा 30.9
धर्मशाला 29.0
मनाली 27.2
शिमला 24.0