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Himachal Weather: मानसून का कहर, सैकड़ों सड़कें-बिजली ट्रांसफार्मर ठप; शिमला में भूस्खलन से कई मकानों को खतरा

Sat, 11 Jul 2026 11:20 AM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला।

सार

भारी बारिश से कई इलाकों में तबाही हुई है। जगह-जगह भूस्खलन से सैकड़ों सड़कें ठप हो गई हैं। कई इलाकों में बिजली आपूर्ति ठप है। शिमला में भूस्खलन से कई मकानों को खतरा पैदा हो गया है। कई जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट है।
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हिमाचल में भारी बारिश से जगह-जगह तबाही। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश में लगातार दो दिन हुई भारी बारिश से कई इलाकों में तबाही हुई है। जगह-जगह भूस्खलन से सैकड़ों सड़कें ठप हो गई हैं। कई इलाकों में बिजली आपूर्ति भी बाधित हो गई है। प्रदेश में छोटी-बड़ी करीब 310 सड़कें बाधित हैं। करीब 400 बिजली ट्रांसफार्मर और 50 पेयजल योजनाएं भी बंद हैं। माैसम विभाग की ओर से कई भागों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। बीते 24 घंटों के दाैरान नाहन में 158.9, सोलन 80.2, नगरोटा सूरियां 62.5, गुलेर 56.3, धौलाकुआं 55.5, नारकंडा 54.5, कुफरी 50.8, सैंज कुल्लू 48.0, शिमला 37.5 और मशोबरा में 36.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। वहीं शिमला में शनिवार को भी भारी बारिश दर्ज की गई।

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बोथवेल में भारी भूस्खलन से मकानों को खतरा
प्रदेश की राजधानी शिमला में लगातार दो दिन हुई भारी बारिश से जगह-जगह नुकसान हुआ है।  संजौली कॉलेज के समीप बोथवेल में भारी भूस्खलन से कई मकानों को खतरा पैदा हो गया है। रझाणा में भूस्खलन की चपेट में आने से दो गाड़ियां मलबे में दब गईं। मिनी कुफ्टाधार में रास्ता ढह गया है। शांकली में भवन का एक हिस्सा गिर गया है। संजौली कॉलेज के समीप बोथवेल क्षेत्र में शनिवार तड़के करीब 4:00 बजे एक बार फिर भारी भूस्खलन हुआ है। भूस्खलन से इलाके में दहशत का माहौल है। उस समय अधिकांश लोग अपने घरों में सो रहे थे। गनीमत रही कि इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन कई मकानों पर खतरा पैदा हो गया है। भूस्खलन संजौली कॉलेज की ओर जाने वाले मार्ग के साथ हुआ, जहां सड़क के नीचे का ढंगा ढहकर नीचे बने रिहायशी मकानों की ओर आ गया। इससे मकानों तक जाने वाला रास्ता भी बीच से टूट गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार करीब तीन से चार भवन खतरे की जद में हैं और किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। 

28 जून 2025 को भी हुआ था भूस्खलन 
स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया कि सुबह से ही वे पार्षद, विधायक और मेयर सहित अन्य जनप्रतिनिधियों को लगातार फोन करते रहे, लेकिन न तो उनका फोन उठाया जा रहा है और न ही कोई उनकी मदद के लिए मौके पर पहुंचा। लोगों ने प्रशासन से तत्काल राहत और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।  गौरतलब है कि इसी स्थान पर 28 जून 2025 को भी भीषण भूस्खलन हुआ था। उस समय पहाड़ी से मलबा और चट्टानें सीधे रिहायशी मकानों में जा घुसी थीं, जिससे कई बच्चे और महिलाएं अपने घरों में फंस गए थे। एक बार फिर उसी क्षेत्र में भूस्खलन होने से स्थानीय लोगों में भय और चिंता का माहौल है।

भारी बारिश से शाक्टी-मरौड़ को जाने वाला रास्ता क्षतिग्रस्त, पुलिया बही
सैंज घाटी में शुक्रवार को दिनभर हुई बारिश के चलते क्षेत्र में काफी नुकसान होने की जानकारी है। घाटी के दुर्गम गांव शाक्टी-मरौड़ जाने वाला रास्ता नदी का जलस्तर बढ़ जाने से क्षतिग्रस्त हो गया है। इसके साथ ही शाक्टी और मरौड़ को जोड़ने वाली पुलिया भी बह गई है। इसके अलावा चैंणगा में लगा पैदल पुल भी नदी के बहाव में बह गया है। इससे इन गांवों को आने जाने वाले लोगों को काफी परेशानी हो रही है।

17 जुलाई तक बरसेंगे बादल
माैसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार राज्य के कई भागों में 17 जुलाई तक हल्की से मध्यम बारिश जारी रहेगी। आज व कल अधिकतर स्थानों पर बारिश होने का पूर्वानुमान है। 13, 14 और 15 जुलाई को राज्य में कई जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। साथ ही 13 और 14 जुलाई को कुछ अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश हो सकती है। सप्ताह के बाकी दिनों में राज्य में कुछ जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। भारी बारिश की स्थिति में निचले इलाकों में पानी जमा होना, सड़कें फिसलन भरी होने, कम दृश्यता व ट्रैफिक जाम की समस्या पैदा हो सकती है। लोगों को ट्रैफिक से जुड़ी सलाहों का पालन करने, जोखिम वाले इलाकों में न जाने, जलाशयों से सुरक्षित दूरी बनाने, मौसम से जुड़ी सलाहों की जानकारी रखने व राज्य सरकार की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने को कहा गया है। 
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डेम से पानी छोड़ने पर पिन पार्वती नदी उफान पर, दहशत में रातभर सो नहीं पाए लोग
 बरसात के बीच सैंज घाटी में बहने वाली पिन पार्वती नदी का जलस्तर बढ़ने से लोग में दहशत का माहौल है। एक तरफ जहां शुक्रवार को जिला में लगातार बारिश का दौर जारी रहा तो वहीं एनएचपीसी ने अपने डेम के  शाम के समय गेट खोल दिए। इससे पिन पर्वती नदी का जलस्तर एकाएक बढ़ गया और लोग दहशत में आ गए। नदी का जलस्तर रात तक उफान में रहा और नदी किनारे रहने वाले सैकड़ों लोग रात को सो भी नहीं पाए। हालांकि, पानी छोड़ने को लेकर एनएचपीसी ने पहले ही लोगों को अलर्ट करते हुए नदी से दूर रहने की अपील की थी। वहीं एनएचपीसी ने सायरन बजाकर लोगों को स्टार्क भी किया था। लेकिन उफनती नदी ने लोगों की बेचैनी को बढ़ा दिया है। बता दें, 2023 से लेकर 2025 तक पार्वती नदी ने घाटी में भारी तबाही मचाई है।
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