कल्याणपुर में शुक्रवार रात अचानक भूस्खलन का सिलसिला शुरू होने से यहां लोग रात को जान बचाकर भागे। रामपुर और आनी उपमंडल के विभिन्न स्थानों में सड़कें बंद होने से निगम की 23 बसें फंसी हुई हैं। करसोग के थनाली में भूस्खलन से छह कमरों का मकान गिरने का खतरा बन गया है। सरकाघाट के तहत भांबला पंचायत के रोपा गांव में दो मंजिला गोशाला ढह गई है।
चंबा के चुराह के देहरा में एक कच्चा मकान ढह गया। हमीरपुर के भोरंज में बारिश के कारण दो पशुशालाएं और दो कच्चे मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। पिछले दिनों गड़सा में बादल फटने से बही एक कार शनिवार को खड्ड से निकाली गई। राजधानी शिमला में सुबह और दोपहर को कुछ देर के लिए बादल झमाझम बरसे। प्रदेश में शनिवार शाम तक 468 सड़कों पर वाहनों की आवाजाही ठप रही। 234 पेयजल योजनाएं भी प्रभावित चल रही हैं।
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार प्रदेश के कई भागों में आज भारी बारिश का येलो अलर्ट है। 30 जुलाई से मौसम में कुछ सुधार की संभावना है। हालांकि, 2 अगस्त के लिए फिर भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी हुआ है। प्रदेश में कई भागों में 4 अगस्त तक मौसम खराब बना रह सकता है। शुक्रवार रात को रामपुर शिमला में 72.6, कोटखाई 43.4 और कटौला मंडी में 41.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।
केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश के लिए 101.82 करोड़ रुपये जारी किए हैं। इस राशि से जिला चंबा और हमीरपुर की सड़कों की हालात को सुधारा जाना है। जिला हमीरपुर की सड़क बागचल वाया मेहर, बड़सर रोड पर 49 करोड़ और जिला चंबा की शाहपुर, सिहुंता सड़क को अपग्रेड करने में 52.82 करोड़ रुपये खर्च होंगे। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने राशि जारी करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी का आभार जताया है।
सरकार के अनुसार आपदा, भारी बारिश से नुकसान का आंकड़ा 8,882.4 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इस बार मानसून में 24 जून से 29 जुलाई तक प्रदेश में 5620.22 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो चुका है। 187 लोगों की जान गई है। 215 लोग जख्मी हुए हैं। 702 मकान ढह गए, जबकि 7161 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। इस दौरान भूस्खलन की 72 और अचानक बाढ़ की 52 घटनाएं सामने आई हैं।
कांगड़ा स्थित पौंग बांध से शनिवार को 49,569 क्यूसिक पानी छोड़ा गया। बांध में पानी का जलस्तर फिर बढ़ने लगा है। शनिवार शाम को 56,140 क्यूसिक पानी बांध में जमा हुआ। बांध में अभी पानी खतरे के निशान से 15 फीट दूर है।