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विधानसभा में भारी हंगामा, भाजपा ने किया वॉकआउट

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हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन विपक्षी दल भाजपा ने भारी हंगामे के बाद वाकआउट किया। भाजपा विधायकों ने मुख्यमंत्री के प्रधान निजी सचिव के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय में चल रहे मामले में पुलिस अधिकारी को धमकाने का आरोप लगाते हुए प्रश्नकाल से पहले ही इस पर चर्चा कर स्थिति स्पष्ट करने को कहा।
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विधानसभा अध्यक्ष बीबीएल बुटेल की ओर से बाद में चर्चा पर विचार करने की बात करने पर भाजपा विधायकों ने लगभग आधे घंटे तक नारेबाजी की और फिर वाकआउट कर गए। आधे घंटे तक सदन बिना विपक्ष के ही चलता रहा।

सोमवार दोपहर दो बजे सत्र शुरू होते ही भाजपा के मुख्य सचेतक सुरेश भारद्वाज और विधायक रविंद्र रवि ने कहा कि ईडी में प्रतिनियुक्ति पर आए एक पुलिस अधिकारी को मुख्यमंत्री कार्यालय में धमकाया गया है। इस विषय पर नियम 167 के तहत नोटिस दिया है। इस पर चर्चा करवाई जाए।
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सदन में होती रही नारेबाजी

स्पीकर बुटेल ने कहा कि अभी प्रश्नकाल का समय है। नियम में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्हें दोपहर को ही नोटिस मिला है और इसे सरकार के ध्यान में लाया गया है। जैसे ही सरकार से सूचना आ जाती है तो इस पर फैसला हो जाएगा।

भारद्वाज ने कहा कि ये भ्रष्टाचार के मामले को दबाने की कोशिश है। सदन में नारेबाजी चलती रही। राजीव बिंदल, रणधीर शर्मा सहित विपक्ष के अन्य विधायक चर्चा के लिए दबाव बनाते रहे। ढाई बजे स्पीकर ने विपक्ष के सदस्यों को कार्रवाई की चेतावनी दी। इसी बीच भाजपा विधायक सदन से बाहर चले गए। फिर प्रश्नकाल की समाप्ति के बाद ही वापस लौटे।

लावारिस पशुओं के लिए बनाई नीति में संशोधन करेगी सरकार

हिमाचल सरकार लावारिस पशुओं के लिए बनाई नीति में संशोधन करेगी। राज्य सरकार हरियाणा और पंजाब से हिमाचल में आवारा पशुओं को छोड़ने वालों पर भी कार्रवाई करने का सख्त प्रावधान करेगी। यह जानकारी पशुपालन मंत्री अनिल शर्मा ने सोमवार को प्रश्नकाल में सदन में कही।
 
प्रदेश विधानसभा में नूरपुर के कांग्रेस विधायक अजय महाजन के सवाल के जवाब में पशुपालन मंत्री अनिल शर्मा ने कहा कि लावारिस पशुओं की संख्या 32 हजार 130 है, पर राज्य में 75 गोसदनों में केवल 7451 पशुओं को रखने की ही व्यवस्था है। विधायक किशोरी लाल ने कहा कि पंजाब से भी गायों और बैलों को लाकर हिमाचल प्रदेश छोड़ा जा रहा है।

इस पर मंत्री अनिल शर्मा ने कहा कि यह एक गंभीर मसला है। बाहरी प्रदेशों से ये ट्रकों में यहां छोड़े जा रहे हैं। विभाग विचार कर रहा है कि इनसे कैसे निपटा जाए। मंत्री ने कहा कि प्रदेश में सभी लावारिस पशुओं के लिए ठिकाने बनाने को 66 करोड़ रुपये चाहिए।

इसके लिए नीति में संशोधन होगा और इसमें धार्मिक संस्थाओं को भी जोड़ा जाएगा। इस मामले में महेश्वर सिंह, संजय रतन और आशा कुमारी ने भी अनुपूरक सवाल किए। मंत्री ने कहा कि गौशालाओं के लिए राज्य सरकार की जमीन को एक्वायर करने की मंशा भी नजर आ रही है।

पशुओं में माइक्रो चिप लगाने पर विचार कर रही सरकार

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा है कि प्रदेश में लावारिस पशुओं का मसला गंभीर है। उन्होंने कहा कि पहले गायों का खास स्थान होता था। आज उन्हें खुले में छोड़ा जा रहा है। एक समय में तो मां-बाप को भी घर से बाहर करने की मनोवृत्ति हो जाएगी। वीरभद्र ने कहा कि इसके लिए जगह-जगह पर गौशालाएं खोली जानी चाहिए। सरकार इससे विमुख नहीं हो सकती।

पंजाब और हरियाणा से कुछ लोग लावारिस पशुओं को ट्रकों में हिमाचल छोड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब सरकार पशुओं के भीतर माइक्रो चिप लगाने पर विचार कर रही है। इसे रोटी में खिलाकर पशु को दिया जाएगा। बाद में यह उसके पेट में रहेगी। उसी से बाहर से मालूम हो जाएगा कि पशु का मालिक कौन है। भविष्य में लावारिस पशुओं को रोकने का यह कारगर तरीका हो सकता है।

रिश्ता योजना प्रदेश सरकार की पहल : सुधीर

शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा ने कहा कि प्रदेश में हाल ही में आरंभ की गई राजीव गांधी इल्यूमिनेटिंग स्कीम फॉर हिल टाउनस एडवांसमेंट (रिश्ता) योजना स्मार्ट सेवाओं को सुदृढ़ बनाने में कारगर साबित होगी। इससे प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को स्मार्ट सेवाएं और शहरी स्थानीय निकायों में बेहतर शासन व्यवस्था के लिए एकीकृत स्मार्ट सेवाओं की व्यापक उपलब्धता होगी।

इस एकीकृत परियोजना से सभी शहरी स्थानीय निकायों में स्मार्ट स्ट्रीट लाइटिंग, वाई-फाई, स्मार्ट सुरक्षा निगरानी, जन संबोधन प्रणाली जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं सृजित की जाएंगी। केवल वर्तमान स्ट्रीट लाइटों को बदल कर उनके स्थान पर एलईडी लाइट्स ही नहीं लगाई जाएंगी बल्कि अन्य अनेक स्मार्ट सेवा घटक भी इसमें सम्मिलित हैं। सुधीर शर्मा ने कहा कि यह योजना पूर्णत: प्रदेश की पहल है।

अब आरकेएस से नहीं होगी डॉक्टरों की भर्ती

स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने कहा कि अब प्रदेश में रोगी कल्याण समितियों के तहत डॉक्टरों को भर्तियां नहीं होंगी। चिकित्सक अब अनुबंध आधार पर रखे जाएंगे और उन्हें पांच साल बाद नियमित किया जाएगा। स्वास्थ्य मंत्री ने यह जानकारी भाजपा विधायक राजीव बिंदल और सुरेश भारद्वाज की ओर से लाए ध्यान आकर्षण प्रस्ताव के बाद दी।

कौल सिंह ने सदन में बताया कि डॉक्टर हड़ताल पर नहीं हैं, वह अपनी मांगों को लेकर सांकेतिक संघर्ष कर रहे हैं। डॉक्टरों की मांगों को लेकर एसोसिएशन और एसीएस (स्वास्थ्य) की बैठक हो चुकी है। डॉक्टरों ने 13 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा है, जिसे सरकार गंभीरता से ले रही है। जहां तक डॉक्टरों की सुरक्षा की बात है, इसको लेकर गृह विभाग और जिला प्रशासन को पत्र भेजे जा चुके हैं।

उन्होंने कहा कि जेनरिक दवाइयां न लिखने की मांग सही नहीं है। मरीजों को सस्ती दवाइयां उपलब्ध कराने के लिए जेनरिक दवाइयां लिखने का फैसला लिया गया है। पदोन्नति मामला भी ध्यान में है। जल्द ही बीएमओ को पदोन्नति का तोहफा दिया जा रहा है। डॉक्टरों को एक महीने की छुट्टी सीएमओ जबकि इससे ज्यादा छुट्टियां देने का फैसला सरकार लेगी।
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आपदा से बेघर लोगों को जमीन देगी सरकार

राजस्व मंत्री ठाकुर कौल सिंह ने बताया कि प्रदेश में आपदा से बेघर हुए लोगों को घर बनाने के लिए जमीन दी जाएगी। पटवारियों की मदद से जमीनें तलाशी जाएंगी। उन्होंने कहा कि आपदा से प्रदेश में सैकड़ों लोगों के मकान गिरे हैं। सरकार लोगों को मकान बनाने के लिए धन भी देगी। प्रदेश में भारी बारिश और बादल फटने से 83 लोगों की मौत हुई है।

अब तक बारिश और बादल फटने से 676.57 करोड़ का नुकसान हुआ है। प्रदेश भर से नुकसान की रिपोर्ट मिल रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में मुख्य रूप से तीन बड़ी दुखद घटनाएं हुई हैं। धर्मपुर बस अड्डा बारिश के पानी के साथ बह गया। मणिकर्ण गुरुद्वारा की सराय पर चट्टान गिरने से 7 श्रद्धालुओं की मौत हो गई। अभी भी चट्टानें खिसकने का खतरा बना हुआ है। गुरुद्वारे को खाली करवा दिया है।
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