एक ट्रस्ट को पंजीकरण के तीन साल के भीतर ही 25 लाख रुपये की सरकारी ग्रांट जारी करने पर हिमाचल विधानसभा की लोक लेखा समिति ने योजना अधिकारी से जवाब तलब किया है। शुक्रवार को धर्मशाला में लोक लेखा समिति ने कांगड़ा जिला के अधिकारियों के साथ बैठक की।
इसमें एक ट्रस्ट को कथित तौर पर नियमों को ताक पर रखकर 25 लाख रुपये का बजट जारी करने का मामला उठा। बैठक में कहा गया कि पंजीकरण के तीन साल के अंदर किसी भी ट्रस्ट को सरकार की ओर से कोई ग्रांट जारी नहीं की जाती है। फिर ग्रांट जारी कैसे हो गई।
समिति की सभापति एवं विधायक आशा कुमारी ने योजना अधिकारी से मामले में लिखित रूप से रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए। इसके अलावा कैग रिपोर्ट के मुताबिक विभिन्न विभागों के ऑडिट पैरा पर चर्चा व समाधान को लेकर मंथन किया गया।
उन्होंने लंबित मामलों को जल्द निपटने के निर्देश दिए। इसके अलावा ज्वालाजी मंदिर की प्रॉपर्टी को स्वास्थ्य विभाग को देने का मामला भी बैठक में गर्माया। इस मामले में करीब 7 करोड़ रुपये के खर्च पर ऑडिट आब्जेक्शन की बात कही गई।
सरकारी विभागों में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर देते हुए सभी विभागों को सरकारी धन का सही तरीके से उपयोग करने पर बल दिया। बैठक में उनके साथ समिति सदस्य चिंतपूर्णी के विधायक बलवीर चौधरी, जवाली के अर्जुन सिंह, सुंदरनगर के राकेश जम्वाल, बिलासपुर के सुभाष ठाकुर और देहरा के होशियार सिंह उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि सरकार जनकल्याण के लिए जो धन देती है उसका सही उपयोग हो।
बैठक में समिति ने लोक निर्माण, स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्रामीण विकास, राजस्व, योजना, सामाजिक कल्याण, कृषि, लोक निर्माण विभाग, परिवहन पशुपालन और आबकारी एवं कराधान विभाग सहित अन्य विभागों के कैग रिपोर्ट के मुताबिक बने ऑडिट पैरा पर चर्चा की और संबंधित अधिकारियों से मौखिक उत्तर लिए।
बैठक में समिति सदस्यों ने विकास परियोजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करने एवं कार्यप्रणाली में जवाबदेही तय करने को लेकर अपने बहुमूल्य सुझाव दिए। इस मौके पर उपायुक्त कांगड़ा राकेश कुमार प्रजापति, पुलिस अधीक्षक विमुक्त रंजन, एडीसी राघव शर्मा, एएसपी राजेश कुमार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।