राज्य सरकार ने तबादलों और एडजस्टमेंट से जुड़ी फाइलों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। सभी विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि ऐसी फाइलें सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय को न भेजी जाएं। सीएम कार्यालय में तबादलों और एडजेस्टमेंट की फाइलों का ढेर लग गया है। सरकार की ओर से पहले ही तबादलों पर रोक लगाई जा चुकी है, बावजूद विभिन्न विभागों से लगातार फाइलें तैयार कर मंत्री कार्यालयों को भेजी जा रही हैं। इसके बाद इन फाइलों को मुख्यमंत्री कार्यालय से मंजूरी के लिए आगे बढ़ाया जा रहा है।
सीएम कार्यालय में बड़ी संख्या में लंबित फाइलें जमा हो गई हैं, इससे निर्णय लेने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। यही कारण है कि अब सरकार ने विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे नियमों का पालन करें और केवल अत्यंत आवश्यक मामलों में ही प्रस्ताव आगे भेजें। सामान्य या रूटीन एडजस्टमेंट मामलों को विभाग स्तर पर ही निपटाने के लिए कहा गया है।
सरकार का मानना है कि तबादलों पर लगी रोक के दौरान इस तरह की फाइलों का भेजा जाना नीतिगत निर्णयों के खिलाफ है। इससे पारदर्शिता और प्रशासनिक अनुशासन दोनों प्रभावित होते हैं। अधिकारियों को यह भी चेतावनी दी गई है कि अनावश्यक रूप से फाइलें भेजने पर जवाबदेही तय की जाएगी। इस पूरी कार्रवाई के बाद यह साफ हो गया है कि सरकार अब तबादलों के मामलों में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरतना चाहती। आने वाले समय में फाइलों की निगरानी और सख्ती से की जाएगी।
अत्यंत जरूरी फाइलें ही भेजें
केवल अत्यंत आवश्यक मामलों में ही प्रस्ताव आगे भेजें। सामान्य या रूटीन एडजस्टमेंट मामलों को विभागीय स्तर पर निपटारा करने के लिए कहा गया है।