शिक्षक दिवस पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की ओर से दिए गए बयान पर राजकीय अध्यापक संघ बिफर गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि था कि अध्यापकों की अनुशासनहीनता के कारण स्कूलों में बायोमीट्रिक मशीनें और सीसीटीवी कैमरा लगाने की नौबत आई है। संघ का कहना है कि राज्य सचिवालय, उपायुक्त कार्यालय सहित अन्य कार्यालयों में भी बायोमीट्रिक और सीसीटीवी कैमरा लगे हैं। इसका मतलब क्या वहां के कर्मचारी और अधिकारी भी अनुशासन में नहीं रहते हैं। इतना ही नहीं सीएम ने यह भी नसीहत दे डाली कि अध्यापकों की अनुशासनहीनता के कारण सार्वजनिक धन की बर्बादी करनी पड़ी है। मुख्यमंत्री को अध्यापक दिवस पर सार्वजनिक धन का ध्यान तो आया, लेकिन मंत्रियों, विधायकों के भत्ते बढ़ाते समय सरकार को सार्वजनिक धन की चिंता नहीं रहती। अवैतनिक पदों पर तैनात प्रतिनिधियों के वेतन और भत्तों में भी सरकार बेतहाशा वृद्धि कर रही है।
संघ के प्रदेशाध्यक्ष वीरेंद्र चौहान, प्रवक्ता एवं मुख्य प्रेस सचिव कैलाश ठाकुर, वित्त सचिव मुकेश शर्मा, मुख्य संरक्षक अजीत चौहान, संरक्षक अरुण गुलेरिया, वरिष्ठ उपाध्यक्ष सरोज मेहता, मनोहर शर्मा, दिलेर सिंह जंवाल, उपाध्यक्ष डीपी शर्मा, जोगिंद्र चंदेल, विकास महाजन, कुलदीप अत्री, सुनील शर्मा, कपिल, श्याम लाल हांडा, सुभाष चंदेल, सचिन जसवाल, महिला विंग की अध्यक्ष कविता विजल्वान, उपाध्यक्ष ममता चौधरी, रीना भारद्वाज, शिमला के महावीर कैंथला, सिरमौर के राजीव ठाकुर, सोलन के नरोत्तम वर्मा, बिलासपुर के राकेश संधू, कुल्लू के यशपाल शर्मा, मंडी के अश्वनी गुलेरिया, किन्नौर के राधाकृष्ण नेगी, लाहौल-स्पीति के पालम सिंह, चंबा के हरिप्रसाद शर्मा, कांगड़ा के नरेश धीमान और हमीरपुर के नरेश ने कहा कि राज्य स्तरीय अध्यापक सम्मान समारोह में शिक्षकों के खिलाफ ही मुख्यमंत्री ने इस तरह का बयान दे दिया। इससे शिक्षकों का मनोबल गिरा है।