हिमाचल में कई अफसरों और नेताओं का लाल और नीली बत्ती का मोह नहीं छूट रहा है। सरकार ने बेशक वीआईपी कल्चर की सूचक बत्तियों को हटवाने की अधिसूचना को लागू कर दिया हो, मगर सभी नेताओं-अफ सरों की गाड़ियों से अभी तक बत्तियां नहीं उतरी हैं। राज्य सचिवालय के बाहर शनिवार को भी बत्ती लगी गाड़ियां नजर आईं।
नेता और अफसर प्रदेश सरकार के आदेश को धत्ता बताते नजर आए। किसी ने अपनी गाड़ियों की बत्तियां ढक रखी हैं तो किसी ने खुली भी छोड़ रखी हैं। हिमाचल में अब हाईकोर्ट के जजों के अलावा कोई भी वाहनों पर लाल बत्ती नहीं लगा सकेंगे। राज्य सरकार ने शुक्रवार को ही वीआईपी के लिए लाल, नीली या पीली बत्ती के प्रावधान से जुड़ी तमाम अधिसूचनाएं वापस लेकर नई अधिसूचना जारी कर दी।
इसे शनिवार को राजपत्र में भी प्रकाशित कर दिया गया, जिसके बाद ये अधिसूचना लागू हो चुकी है। नई अधिसूचना जारी कर सरकार ने मुख्यमंत्री, मंत्रियों, विधायकों, चेयरमैनों और अधिकारियों के वाहनों पर वीआईपी कल्चर की सूचक बत्तियों पर रोक लगा दी है।
नई अधिसूचना में हिमाचल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और अन्य जजों को लाल बत्ती लगाने का प्रावधान बरकरार रखा गया है। सरकार के इस आदेश के बाद सूबे में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह, मंत्री, विधायक, निगम-बोर्डों के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष और प्रशासनिक अधिकारी किसी भी तरह की बत्ती नहीं लगा सकेंगे।