हिमाचल प्रदेश में मानसून के सक्रिय होने के साथ ही सर्पदंश (स्नेक बाइट) की घटनाओं में चिंताजनक वृद्धि देखी जा रही है। लगातार हो रही बारिश के कारण सांप अपने बिलों और सुरक्षित ठिकानों से निकलकर आबादी वाले क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेशवासियों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। मंडी और बिलासपुर जिलों से सामने आ रहे आंकड़े इस खतरे की गंभीरता को उजागर कर रहे हैं।
अस्पतालों में बढ़ी सर्पदंश के मरीजों की संख्या
क्षेत्रीय अस्पताल मंडी में पिछले एक महीने के दौरान सर्पदंश के लगभग 15 मरीज इलाज के लिए पहुंचे। राहत की बात यह है कि अधिकांश मरीजों को समय पर एंटी-स्नेक वेनम (ASV) मिलने से वे स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं, हालांकि तीन मरीज अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं और उनका इलाज चल रहा है। चिकित्सकों के अनुसार, समय पर उपचार मिलने से मरीजों की हालत में तेजी से सुधार हो रहा है।
वहीं, बिलासपुर जिले में वर्ष 2026 में अब तक 13 सर्पदंश के मामले दर्ज किए गए हैं। झंडूता क्षेत्र में एक व्यक्ति की मृत्यु की सूचना भी मिली है, हालांकि यह मामला विभागीय रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है। पिछले वर्ष, यानी 2025 में, जिले में कुल 59 सर्पदंश के मामले सामने आए थे। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि कई बार मरीज सीधे बड़े अस्पतालों में चले जाते हैं या इलाज में देरी करते हैं, जिसके कारण स्थानीय स्तर पर सभी मामलों का सटीक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हो पाता।
पर्याप्त एंटी-स्नेक वेनम की उपलब्धता
स्वास्थ्य विभाग ने आश्वस्त किया है कि प्रदेश के जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) में एंटी-स्नेक वेनम (ASV) की पर्याप्त मात्रा उपलब्ध है। केवल बिलासपुर जिले में ही लगभग 1100 एंटी-वेनम डोज मौजूद हैं, और प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र में तत्काल उपचार के लिए आवश्यक डोज सुरक्षित रखी गई हैं।
विशेषज्ञों की सलाह और बचाव के उपाय
विशेषज्ञों के अनुसार, बरसात के मौसम में सांप खेतों, घास के ढेरों, लकड़ियों के गट्ठरों, पत्थरों के बीच, गोशालाओं और घरों के आसपास अधिक सक्रिय हो जाते हैं। ऐसे में, किसानों, मजदूरों, पशुपालकों और जंगलों में काम करने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
मुख्य चिकित्सा विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया है कि सर्पदंश के बाद के शुरुआती एक से दो घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। मरीज को जितनी जल्दी अस्पताल पहुंचाकर एंटी-वेनम दिया जाएगा, उसके स्वस्थ होने की संभावना उतनी ही अधिक होगी। उन्होंने लोगों से अंधविश्वासों, जैसे झाड़-फूंक, जहर चूसने, चीरा लगाने या किसी भी प्रकार के घरेलू उपचार से दूर रहने की कड़ी अपील की है।
सर्पदंश होने पर तुरंत क्या करें:
- मरीज को घबराने न दें और उसे शांत रखने का प्रयास करें।
- काटे गए अंग को कम से कम हिलाने-डुलाने दें।
- तुरंत मरीज को नजदीकी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र ले जाएं।
- यदि संभव हो, तो सांप के रंग या उसकी पहचान याद रखें, लेकिन उसे पकड़ने का बिल्कुल भी प्रयास न करें।
- चिकित्सक की सलाह के बिना कोई भी दवा न दें।
- झाड़-फूंक, चीरा लगाने या जहर चूसने जैसे तरीकों से कतई परहेज करें।