दुर्लभ बीमारियों के प्रबंधन में सबसे बड़ी चुनौती समय पर पहचान न होना है। एम्स बिलासपुर में इस आधुनिक तकनीक के जरिये शिशुओं के रक्त के नमूनों की सूक्ष्म जांच की जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि शुरुआती घंटों या दिनों में बीमारी पकड़ में आ जाए, तो समय रहते उपचार से बच्चे को स्थायी विकलांगता या गंभीर खतरों से बचाया जा सकता है।
आंकड़ों के मुताबिक दुनिया भर में कई दुर्लभ बीमारियां हैं, जिनसे आठ फीसदी आबादी प्रभावित है। इनमें से 75 फीसदी बच्चे हैं। एम्स के कुलपति डॉ. राकेश कुमार सिंह ने बताया कि भारत सरकार की राष्ट्रीय दुर्लभ रोग नीति के तहत मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं में बड़ा इजाफा किया गया है। वर्तमान में राष्ट्रीय नीति के तहत 63 दुर्लभबीमारियों को उपचार के लिए अधिसूचित किया गया है।