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हिमाचल: लाइलाज नहीं रहेंगे अब गंभीर रोग, एम्स बिलासपुर ने शुरू की आधुनिक स्क्रीनिंग

Sat, 28 Feb 2026 11:21 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर।

सार

 वर्ष 2026 की थीम मोर देन यू कैन इमेजन के साथ इस बार उन परिवारों के संघर्ष को रेखांकित किया जा रहा है, जो दुर्लभ बीमारियों से जूझ रहे हैं।
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एम्स बिलासपुर। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दुनिया भर में हर साल फरवरी का अंतिम दिन विश्व दुर्लभरोग दिवस के रूप में मनाया जाता है। वर्ष 2026 की थीम मोर देन यू कैन इमेजन के साथ इस बार उन परिवारों के संघर्ष को रेखांकित किया जा रहा है, जो दुर्लभ बीमारियों से जूझ रहे हैं। इस दिशा में एम्स बिलासपुर ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। संस्थान में उच्च जोखिम वाली माताओं के नवजात शिशुओं की आनुवंशिक विकारों की जांच अब टैंडम मास स्पेक्ट्रोमेट्री तकनीक से की जा रही है।

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दुर्लभ बीमारियों के प्रबंधन में सबसे बड़ी चुनौती समय पर पहचान न होना है। एम्स बिलासपुर में इस आधुनिक तकनीक के जरिये शिशुओं के रक्त के नमूनों की सूक्ष्म जांच की जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि शुरुआती घंटों या दिनों में बीमारी पकड़ में आ जाए, तो समय रहते उपचार से बच्चे को स्थायी विकलांगता या गंभीर खतरों से बचाया जा सकता है।
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आंकड़ों के मुताबिक दुनिया भर में कई दुर्लभ बीमारियां हैं, जिनसे आठ फीसदी आबादी प्रभावित है। इनमें से 75 फीसदी बच्चे हैं। एम्स के कुलपति डॉ. राकेश कुमार सिंह ने बताया कि भारत सरकार की राष्ट्रीय दुर्लभ रोग नीति के तहत मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं में बड़ा इजाफा किया गया है। वर्तमान में राष्ट्रीय नीति के तहत 63 दुर्लभबीमारियों को उपचार के लिए अधिसूचित किया गया है। 
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