शनिवार को निदेशक स्कूल शिक्षा आशीष कोहली की ओर से जारी आदेशों में कहा गया है कि बीते वर्षों में विभिन्न न्यायालयों द्वारा दिए गए फैसलों, पूर्व प्रभाव नियमितीकरण तथा सेवा लाभों से संबंधित आदेशों के कारण मौजूदा वरिष्ठता सूची में व्यापक बदलाव की आवश्यकता उत्पन्न हुई है। ऐसे में पुरानी सूची को बरकरार रखना न्यायोचित नहीं माना गया और वरिष्ठता का निर्धारण नए सिरे से करने का निर्णय लिया गया है। निदेशालय के अनुसार 1995 से 2000 के बीच अनुबंध आधार पर नियुक्त कई प्रवक्ताओं को उच्च न्यायालय के आदेशों के बाद पूर्व प्रभाव से नियमितीकरण का लाभ मिला है। कई मामलों में अदालतों ने प्रारंभिक नियुक्ति तिथि से नियमित सेवा मानने तथा उससे जुड़े सभी परिणामी लाभ देने के निर्देश दिए हैं।
इन आदेशों के बाद संबंधित शिक्षकों की सेवा अवधि बढ़ गई, जिससे वरिष्ठता क्रम में बड़ा बदलाव स्वाभाविक हो गया। यदि इन न्यायिक आदेशों को वरिष्ठता सूची में समुचित रूप से शामिल नहीं किया जाता तो प्रभावित शिक्षकों के साथ न्याय नहीं हो पाता और भविष्य में नए विवाद खड़े हो सकते थे।
इसी कारण निदेशालय ने व्यापक पुनरीक्षण की प्रक्रिया शुरू की है। शिक्षा निदेशालय ने 1 जनवरी 2006 से 31 दिसंबर 2012 तक की अवधि की अस्थायी वरिष्ठता सूची जारी कर दी है। यह सूची निदेशालय की वेबसाइट पर उपलब्ध करा दी गई है। यदि किसी प्रवक्ता का नाम सूची में शामिल नहीं है, सेवा विवरण में त्रुटि है, नियुक्ति या नियमितीकरण की तिथि गलत दर्ज है अथवा किसी अन्य प्रकार की आपत्ति है तो संबंधित शिक्षक अपने डीडीओ के माध्यम से दस्तावेजी प्रमाण सहित 15 दिनों के भीतर दावा या आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। निर्धारित अवधि के बाद प्राप्त आपत्तियों पर विचार नहीं किया जाएगा। सभी दावों और आपत्तियों की जांच के बाद अंतिम वरिष्ठता सूची प्रकाशित की जाएगी।