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हिमाचल प्रदेश: अगले सत्र से स्कूल एडमिशन फॉर्म में नहीं होगा जाति का कॉलम, मुख्यमंत्री सुक्खू ने दिए निर्देश

Wed, 26 Aug 2026 04:45 PM IST
Ankesh Dogra न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला

सार

हिमाचल प्रदेश में अगले शैक्षणिक सत्र से स्कूलों के एडमिशन फॉर्म में जाति का कॉलम नहीं होगा। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने अनुसूचित जाति कल्याण बोर्ड की बैठक में इसके निर्देश दिए। सरकार का उद्देश्य बच्चों को जातिगत भेदभाव और हीन भावना से बचाना है। हालांकि, सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए पात्र लोग अपनी जाति की जानकारी दे सकेंगे। बैठक में सामाजिक सुरक्षा पेंशन और कल्याणकारी योजनाओं पर भी चर्चा हुई।
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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू (फाइल फोटो)। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश सरकार ने स्कूलों में दाखिले से जुड़ी व्यवस्था में अहम बदलाव करने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने निर्देश दिए हैं कि अगले शैक्षणिक सत्र से स्कूलों के एडमिशन फॉर्म में जाति का कॉलम नहीं रखा जाएगा। सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य बच्चों को जाति के आधार पर होने वाले भेदभाव और हीन भावना से बचाना है। मुख्यमंत्री ने यह निर्देश हिमाचल प्रदेश अनुसूचित जाति कल्याण बोर्ड की बैठक की अध्यक्षता करते हुए दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार समाज में जाति के नाम पर भेदभाव को समाप्त करने और आपसी भाईचारे को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।

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सरकारी योजनाओं के लाभ के लिए जाति की जानकारी देने की सुविधा
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि स्कूल के सामान्य दाखिला फॉर्म से जाति का कॉलम हटाया जाएगा, लेकिन सरकारी योजनाओं और कल्याणकारी सुविधाओं का लाभ लेने के लिए अनुसूचित जाति वर्ग के लोग आवश्यकतानुसार अपनी जाति की जानकारी दे सकेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी पात्र व्यक्ति को अनुसूचित जाति के लिए उपलब्ध योजनाओं के लाभ से वंचित करना नहीं है। बच्चों के स्तर पर जातिगत पहचान के कारण पैदा होने वाली हीन भावना को कम करना इस पहल का प्रमुख उद्देश्य है।

अनुसूचित जाति समुदाय के कल्याण पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार अनुसूचित जाति समुदाय की समस्याओं के समाधान को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस वर्ग के सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं और पात्र लोगों तक इनका लाभ पहुंचाने के लिए जागरूकता जरूरी है। उन्होंने बताया कि राजीव गांधी स्टार्ट-अप स्वरोजगार सौर योजना के तहत परियोजनाएं स्थापित करने के लिए सरकार की ओर से अनुदान दिया जा रहा है। इसके अलावा मेधावी विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा जारी रखने के लिए एक प्रतिशत ब्याज दर पर 20 लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध करवाया जा रहा है।
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अति निर्धन परिवारों के लिए भी योजना
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार अति निर्धन परिवारों के लिए अपना परिवार सुखी परिवार योजना लागू करने जा रही है। इसके तहत पात्र परिवारों को 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने तथा परिवार की महिलाओं को 1500 रुपये प्रतिमाह पेंशन देने का प्रावधान प्रस्तावित है।
 

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8.41 लाख से ज्यादा लोगों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. कर्नल धनीराम शांडिल ने बैठक में बताया कि प्रदेश में 8,41,917 लोगों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन दी जा रही है। वृद्ध पुरुषों को 1000 रुपये, जबकि महिलाओं, दिव्यांगजनों, विधवाओं और परित्यक्ता या एकल महिलाओं को 1500 रुपये प्रतिमाह पेंशन दी जा रही है।

70 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों तथा 70 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता वाले नागरिकों को 1700 रुपये प्रतिमाह सामाजिक सुरक्षा पेंशन दी जा रही है। वर्तमान वित्त वर्ष में पेंशन योजना पर करीब 1400 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। मंत्री ने बताया कि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं पर इस वित्त वर्ष में करीब 314.90 करोड़ रुपये और अनुसूचित जाति विकास कार्यक्रम के तहत 1105.37 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। बैठक में मुख्य सचिव केके पंत, प्रशासनिक सचिवों, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के सचिव सीपी वर्मा, निदेशक ईएसओएमएसए सुमित खिमटा सहित अनुसूचित जाति कल्याण बोर्ड के सरकारी और गैर सरकारी सदस्य तथा वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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