हिमाचन विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन सदन में जमकर बवाल हुआ। महिला विधायक स्पीकर की चेयर पर बैठ गईं।विपक्षी भाजपा ने बुधवार को सदन में स्पीकर बृज बिहारी लाल बुटेल से डलहौजी की कांग्रेस विधायक आशा कुमारी को मानसून सत्र की आगामी बैठकों से सस्पेंड करने की मांग की।
इस बारे में विपक्ष ने बाकायदा लिखित में विधानसभा अध्यक्ष बृज बिहारी लाल बुटेल से शिकायत कर कार्रवाई मांगी है। आशा कुमारी अध्यक्ष की ओर से सत्र को कुछ समय के लिए स्थगित करने की घोषणा के बाद स्पीकर और डिप्टी स्पीकर की गैर हाजिरी में चेयर पर बैठीं और उन्होंने दोबारा 12 बजे तक सत्र के स्थगन का एलान किया।
इस पर विपक्ष ने कड़ी आपत्ति दर्ज की और भाजपा के मुख्य सचेतक सुरेश भारद्वाज ने आसन पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि सदस्य आशा कुमारी को इस सत्र के लिए सस्पेंड किया जाए।
शीत सत्र में ऐसा करने पर भाजपा विधायक को कर दिया था सस्पेंड
करीब 11 बजकर 20 मिनट पर इस शोर-शराबे के बीच बुटेल सदन की कार्यवाही को थोड़े वक्त के लिए स्थगित कर अपनी सीट से उठकर चले गए। करीब 11 बजकर 42 मिनट पर आशा कुमारी चेयर पर सभापति की भूमिका में आईं और उन्होंने सदन की कार्यवाही को 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।
12 बजे के बाद जब स्पीकर बुटेल ने सदन की कार्यवाही को दोबारा शुरू करवाया तो विपक्ष ने आशा कुमारी के सभापति की चेयर पर बैठने का विरोध किया कि इसके लिए उनके खिलाफ कार्यवाही होनी चाहिए। भाजपा के मुख्य सचेतक सुरेश भारद्वाज ने कहा कि पिछले शीत सत्र में धर्मशाला में उन्हें भी सभापति की भूमिका अपनाने पर सस्पेंड किया गया था।
भाजपा विधायक बोले- दोहरे मापदंड न अपनाएं
आशा कुमारी ने भी यही काम किया है। उन पर भी यही एक्शन होना चाहिए। इस पर जब स्पीकर बुटेल ने कहा कि आशा कुमारी उनके और डिप्टी स्पीकर के बाद सभापतियों के पैनल में शामिल हैं और वे अनुमति के बाद ही चेयर पर बैठीं तो इसके जवाब में भारद्वाज ने दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया।
सदन से बाहर आने पर मीडिया को सुरेश भारद्वाज ने बताया कि इस बारे में स्पीकर को शिकायत की गई है, जिस पर एक्शन मांगा जा रहा है। वहीं, स्पीकर बुटेल ने बताया कि विपक्ष की शिकायत उन्हें मिली हैं, मगर वे इसे डिस्पोज ऑफ करने जा रहे हैं। इस शिकायत पर एक्शन इसलिए नहीं लिया जाएगा, क्योंकि आशा कुमारी को उन्होंने ही आसन पर बैठने की अनुमति दी थी।
सीएम बोले, गुंडे और बदतमीज हैं आप
मुख्यमंत्री वीरभद्र ने बुधवार को विधानसभा सत्र के दौरान भाजपा विधायकों को गुंडा और बदतमीज तक कह डाला। मुख्यमंत्री इतने नाराज थे कि उन्होंने कहा कि विधायकों को अपने खराब आचरण पर शर्म आनी चाहिए। हुआ यूं कि प्रदेश की खराब कानून व्यवस्था पर भाजपा विधायक चर्चा की मांग कर रहे थे।
मांग अस्वीकार होने पर विधायकों ने नारेबाजी शुरू कर दी। इस दौरान विधायकों ने गुड़िया के हत्यारों को, जूते मारो सालों को नारा लगाना शुरू कर दिया।
सीएम वीरभद्र ने इस नारे पर आपत्ति जताई तो विपक्ष के विधायकों और उनके बीच हल्की नोकझोंक होने लगी। विधायकों ने और तेज आवाज में नारा लगाना शुरू किया तो सीएम भड़क गए और उन्होंने विधायकों को गुंडा और बदतमीज तक कह दिया।
बाली के जाने पर जताई नाराजगी
भाजपा विधायकों द्वारा सदन में बेहद आक्रामक रुख अख्तियार करने के बाद मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने सभी विधायकों और मंत्रियों को सत्र के दौरान सदन में मौजूद रहने को कहा था। भाजपा विधायकों के हंगामे और नाराजगी के बीच विधानसभा अध्यक्ष ने सत्र को शुरू किया। सत्र के दौरान एक एक कर सभी मंत्री व समितियों के अध्यक्ष अपने दस्तावेज विधानसभा के पटल पर रखने लगे।
इस दौरान परिवहन मंत्री जीएस बाली को भी एक दस्तावेज रखना था लेकिन वह मौजूद नहीं थे। उनकी जगह संसदीय कार्य मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने दस्तावेज सभा पटल पर रख दिए। इस बीच बाली आए लेकिन मुकेश ने बता दिया कि तो वह उठकर वापस चले गए। इस पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताई और साथी मंत्रियों से चर्चा भी की।
लड़खड़ा गई आशा कुमारी
सदन की कार्यवाही के दौरान विधायक आशा कुमारी करीब पौने बारह बजे सदन में आई और स्पीकर की कुर्सी पर बैठकर सदन की कार्यवाही को 12 बजे तक के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी।
भाजपा विधायकों ने आपत्ति जतानी शुरू की तो वह चेयर से उठ गईं और नीचे उतरने के दौरान वह लड़खड़ा गई। उनकी इसी जल्दबाजी के बाद विधायकों ने सवाल उठाया कि आखिर आशा कुमारी ने इतनी जल्दबाजी क्यों की। इसके बाद उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से आशा कुमारी के निलंबन की मांग भी कर दी।
पांच बीघा भूमि वाले कब्जाधारकों के लिए अभी नियम तय नहीं
प्रदेश सरकार पांच बीघा से कम भूमि पर कब्जा करने वाले कब्जाधारकों को राहत पहुंचाने के लिए काम कर रही है। हालांकि, इससे ज्यादा जमीन कब्जाने वालों को राहत देगी या नहीं, इस पर स्थिति साफ नहीं है। कुल्लू के विधायक महेश्वर सिंह की ओर से पूछे गए सवाल के लिखित जवाब से यह बात सामने आई है।
कुल्लू के विधायक ने पूछा था कि सरकार 5 बीघा से ज्यादा भूमि पर कब्जा करने वालों को राहत प्रदान करने पर विचार रखती है। अगर ऐसा है तो आजतक कितने आवेदन प्राप्त हुए हैं। जवाब में सरकार की ओर से बताया गया कि पांच बीघा तक के कब्जाधारकों जिनकी कुल भूमि दस बीघा से ज्यादा न हो, उनके लिए ही सरकारी भूमि पर (कतिपय मामलों में लघु और सीमांत कृषकों के लिए)
सांपत्तिक अधिकार प्रदान करने के लिए नियम 2017 का प्रारूप बनाया है। खास बात यह है कि इन नियमों के तहत अगर दस बीघा से ज्यादा भूमि हुई तो कब्जाधारक को भूमि छोड़नी होगी। साथ ही सरकार ने बताया कि इन नियमों को अंतिम रूप देने के लिए आम लोगों से सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। साथ ही विधि विभाग से भी विमर्श किया जा रहा है, जिसके बाद ही नियमों को अंतिम रूप दिया जाएगा।
विपक्ष बोला- बाहर नहीं निकल पा रहीं महिलाएं
विधानसभा की कार्यवाही बुधवार को 11 बजे शुरू हुई। शुरुआत में किन्नौर के पूर्व विधायक बलवंत सिंह नेगी के निधन पर सीएम वीरभद्र सिंह, विपक्ष के वरिष्ठ सदस्य गुलाब सिंह ठाकुर और स्पीकर बृज बिहारी लाल बुटेल ने शोकोद्गार प्रस्ताव पर वक्तव्य दिए। सदस्यों ने दो मिनट का मौन रखा।
बुधवार को सदन में नेता प्रतिपक्ष प्रेमकुमार धूमल नहीं थे। उनकी गैर हाजिरी में भाजपा के मुख्य सचेतक सुरेश भारद्वाज ने कहा कि स्थगन के नोटिस लंबित रखे गए हैं। आज ही सरकाघाट में 15 साल की लड़की के साथ गैंगरेप का ताजा मामला सामने आया है। प्रदेश में गुड़िया मामला, होशियार सिंह प्रकरण बहुत गंभीर मुद्दे हैं।
पूरी कार्यवाही स्थगित कर कानून- व्यवस्था के बिगड़े हालात पर चर्चा होनी चाहिए और आसन को दोनों पक्षों का ध्यान रखना चाहिए। महिलाएं बाहर नहीं निकल पा रही हैं और इस पर चर्चा से गुरेज हो रहा है। इसके जवाब में जब संसदीय कार्य मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि आज चर्चा हो रही है तो जवाब में सुरेश भारद्वाज बोले कि कल कह रहे थे कि चर्चा नहीं होगी, क्योंकि मामला सब जुडिस है।
कौल सिंह बोले- बोलने का ठेका सिर्फ विपक्ष को नहीं है
सत्ता पक्ष बयान बदल रहा है। करीब सवा 11 बजे इस पर सदन गरमाने लगा। स्पीकर बुटेल ने कहा कि अन्य नियम 130 में चर्चा की व्यवस्था होने के कारण नियम 67 में चर्चा नहीं होगी। इसी बीच स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर जब बोलने के लिए खड़े हुए तो विपक्ष हंगामा करता रहा।
इस पर कौल सिंह ने कहा कि बोलने का ठेका केवल विपक्ष का नहीं है। इस पर भाजपा विधायकों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। गुड़िया को इंसाफ दिलाने और सरकार को कोसते हुए नारे लगे तो सदन के नेता सीएम वीरभद्र सिंह ने खड़े होकर कहा कि विपक्ष के सदस्य असभ्य भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं।
विपक्ष की गुंडागर्दी से वे डरने वाले नहीं हैं। सदन की समितियों के प्रतिवेदन और एक विनियोग विधेयक को विपक्ष के शोर-शराबे के बीच ही पारित कर दिया गया। करीब 12 बजकर 20 मिनट पर सदन की कार्यवाही को अध्यक्ष ने वीरवार दोपहर 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।