बोले - शिक्षा डिग्री तक सीमित नहीं होनी चाहिए
इन फैसलों का ही परिणाम है कि हिमाचल प्रदेश आज देश में शिक्षा के क्षेत्र में तीसरे स्थान पर पहुंच चुका है। सरकार का अगला लक्ष्य प्रदेश को देश का पहला पूर्ण साक्षर राज्य बनाना है। इसके लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है और अगले एक वर्ष के भीतर हिमाचल में शत-प्रतिशत साक्षरता दर हासिल करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल डिग्री तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव और आत्मनिर्भरता का माध्यम बननी चाहिए। किसी भी स्कूल की सफलता उसके नेतृत्व पर निर्भर करती है। प्राचार्य न केवल प्रशासनिक मुखिया होते हैं, बल्कि वे विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को प्रेरित करने वाले मार्गदर्शक भी होते हैं। जिन स्कूलों और प्राचार्यों को सम्मानित किया गया है, वे पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। स्कूलों और प्राचार्यों को सम्मानित करने की पहल को सराहनीय बताते हुए कहा कि इससे शिक्षा जगत में सकारात्मक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा। ऐसे मंच शिक्षकों और शैक्षणिक संस्थानों के उत्कृष्ट कार्यों को पहचान दिलाने का काम करते हैं। समारोह में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए प्राचार्यों, शिक्षाविदों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने भाग लिया। सम्मानित प्राचार्यों ने इसे शिक्षा क्षेत्र में बेहतर कार्य करने की प्रेरणा बताया।