रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में वर्ष 2024 महंगाई के लिहाज से सबसे चुनौतीपूर्ण रहा। सितंबर से नवंबर के बीच खाद्य वस्तुओं विशेषकर सब्जियों के दामों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। अक्तूबर 2024 में खुदरा मुद्रास्फीति 5.8 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो पिछले 29 महीनों के दौरान सबसे ऊंचा स्तर रहा। आर्थिक विश्लेषणों के अनुसार इस अवधि में प्रतिकूल मौसम, उत्पादन में कमी और आपूर्ति शृंखला पर पड़े दबाव ने कीमतों को ऊपर धकेला। उस समय रसोई का बजट बिगड़ने की शिकायतें आम थीं और खाद्य महंगाई ने आम परिवारों की जेब पर सीधा असर डाला।
दिलचस्प तथ्य है कि यह अवधि हिमाचल के प्रमुख पर्यटन सीजन से अलग थी। दूसरी ओर वर्ष 2025 में जब शिमला, मनाली, धर्मशाला और अन्य पर्यटन स्थलों पर रिकॉर्ड संख्या में पर्यटक पहुंचे, तब महंगाई लगातार नीचे आती रही। बेहतर फसल उत्पादन, खाद्य वस्तुओं की पर्याप्त उपलब्धता, ईंधन कीमतों में अपेक्षाकृत स्थिरता और आपूर्ति प्रबंधन में सुधार के कारण पूरे वर्ष कीमतों पर दबाव कम रहा। इस वजह से वर्ष के अंत तक खुदरा मुद्रास्फीति एक प्रतिशत पहुंच गई। हालांकि 2026 के शुरुआती महीनों में महंगाई ने फिर हल्की रफ्तार पकड़नी शुरू कर दी है।
कृषि आधारित अर्थव्यवस्था का दिखा असर : हिमाचल की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि, बागवानी, दुग्ध उत्पादन पर आधारित है। स्थानीय स्तर पर उत्पादन और खपत के बीच बेहतर संतुलन होने से कीमतों पर नियंत्रण बनाए रखने में मदद मिलती है। इसके अलावा कई जिलों में किसानों द्वारा सीधे बाजारों तक पहुंचने की व्यवस्था ने भी बिचौलियों की भूमिका कम की है, जिससे उपभोक्ताओं को उचित कीमतों पर सामान उपलब्ध हो रहा है।