वह पहले भारतीय मजदूर संघ में सदस्यों की रेटिंग में भी अव्वल रह चुके हैं। यह रेटिंग भारत सरकार का श्रम मंत्रालय और हिमाचल सरकार का श्रम विभाग संयुक्त रूप से करते आए हैं। वह अर्की से भाजपा टिकट के दावेदार रह चुके हैं।
सूत्रों ने बताया कि सुरेंद्र का विधानसभा की राजनीति में सक्रिय होना भी प्रदेश के कुछ राजनेताओं को रास नहीं आ रहा है। इसीलिए वह मुख्यमंत्री कार्यालय से यह दबाव बनाने में कामयाब हो गए कि सुरेंद्र ठाकुर अधिसूचना के दो महीने के बाद भी इस कार्यभार को नहीं संभाल पाए हैं।
उधर, सुरेंद्र ठाकुर ने माना कि अभी उन्होंने ज्वाइनिंग नहीं दी है। कुछ पेच हैं, जिसके हटने के बाद वह जल्द कार्यभार संभाल सकते हैं।