प्रदेश की सरकार चलाने वाले राज्य सचिवालय को अब पेपरलेस करने की तैयारी है। फाइलें पारंपरिक तरीके से एक टेबल से दूसरी टेबल तक पहुंचने की बजाय एक क्लिक में ही दूसरे अधिकारी तक पहुंच जाएंगी। कागज की बर्बादी रुकेगी और पेड़ भी बचेंगे। यही नहीं, सरकार को हर साल स्टेशनरी के नाम पर होने वाले करोड़ों रुपये के नुकसान से भी निजात मिल सकेगी।
सचिवालय प्रशासन विभाग ने करीब पचास करोड़ का प्रोजेक्ट तैयार कर वित्त विभाग को भेज दिया है। वित्तीय मंजूरी मिलने के बाद सचिवालय प्रशासन का लक्ष्य है कि अगले छह महीने के अंदर पूरे कामकाज को स्मार्ट मोड पर ला दिया जाए। सचिव सचिवालय प्रशासन आरएन बत्ता ने बताया कि प्रोजेक्ट तैयार किया गया है ताकि कामकाज में तेजी और पारदर्शिता आ सके।
इस प्रोजेक्ट के लागू होने के बाद फाइल खोने से लेकर फाइल की वर्तमान स्थिति जानने में दिक्कत नहीं होगी। साथ ही देर करने वाले अफसरों, बाबुओं को भी चिह्नित किया जा सकेगा। कहा कि वित्त विभाग से बजट मिलते ही प्रोजेक्ट लागू करने के लिए आईटी विभाग या एनआईसी की मदद ली जाएगी।