नए उद्योग स्थापित करने के लिए हिमाचल ने आंध्र प्रदेश की राह पर चलना शुरू कर दिया है। आंध्र प्रदेश देश के उन राज्यों की सूची में पहले स्थान पर है, जहां उद्योग लगाना पूंजीपतियों की पहली पसंद है। इन्वेस्टर मीट से पहले सरकार ने आंध्र प्रदेश को मॉडल के रूप में अपनाने का फैसला किया है। इज ऑफ डुइंग बिजनेस की सूची में आंध्र प्रदेश सबसे ऊपर है। इस सूची में प्रदेश का छठे नंबर पर है।
इन्वेस्टर मीट करीब आने लगी है और सरकार के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती यही है कि इसे कैसे सफल बनाया जाए ताकि हिमाचल में अधिक से अधिक निवेश आकर्षित कर बड़े-बड़े उद्योग स्थापित किए जा सकें। सरकार ने अफसरों का एक दल विभिन्न राज्यों में अध्ययन करने के लिए भेजा था, जहां इन्वेस्टर मीट सफल रही।
आंध्र प्रदेश में इन्वेस्टर मीट कराई जा चुकी है और यह वहीं राज्य है, जहां उद्योगपति सबसे ज्यादा आकर्षित रहते हैं। नए उद्योग लगाने में समय भी ज्यादा नहीं लगता है। इसी कारण से हिमाचल प्रदेश आंध्र प्रदेश के बताए रास्ते पर भी चलने की तैयारी में ताकि पूंजीपतियों को अधिक लुभाया जा सके।
हिमाचल भी लुभाता है उद्योगपतियों को
भले ही इज ऑफ डुइंग बिजनेस की सूची में हिमाचल प्रदेश छठे स्थान पर है, लेकिन हिमाचल में उद्योग लगाने के लिए बड़े- बड़े उद्योगपति आकर्षित होते रहे हैं। प्रदेश जैसा शांत माहौल उद्योगपतियों को कहीं नहीं मिलता है। सीआईआई के राज्य अध्यक्ष आईएमजेएस संधु ने कहा कि हिमाचल में अच्छी कानून व्यवस्था और शांतिपूर्ण माहौल उद्योगपतियों को मिलता रहा है।
राज्य के विशेष सचिव उद्योग आबिद हुसैन सादिक ने कहा कि आंध्र प्रदेश में इन्वेस्टर मीट के बाद करीब डेढ़ लाख करोड़ का निवेश आया है। आंध्र प्रदेश सरकार ने उद्योगपतियों को लुभाने के लिए क्या कदम उठाए हैं, उसे ध्यान में रखकर सरकार तैयारी करेगी। हिमाचल में क्या कमियां हैं, उनका अध्ययन करके कमियों को दूर करने के लिए सरकार से सिफारिश की जाएगी।