बिजली बोर्ड की कर्मचारी यूनियन ने प्रबंध निदेशक जेपी कालटा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। प्रबंध निदेशक को पद से हटाने की मांग पर अड़ी यूनियन ने सरकार को 22 अक्तूबर तक का अल्टीमेटम दिया है। मांग अनसुनी होने पर इसी दिन बोर्ड मुख्यालय कुमार हाउस परिसर में विरोध प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है। 22 अक्तूबर को अगर यूनियन की विभिन्न मांगों को लेकर सरकार ने वार्ता के लिए नहीं बुलाया तो कुमार हाउस से लेकर सचिवालय तक प्रदर्शन किया जाएगा।
बुधवार को राजधानी शिमला में प्रेस वार्ता कर इंप्लाइज यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप खरवाड़ा ने पांच साल का निर्धारित सेवाकाल पूरा होने के बाद भी प्रबंध निदेशक की सेवाएं जारी रहने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि मई 2019 में जेपी कालटा की नियुक्ति के पांच साल पूरे हो चुके हैं। साल 2017 में इनकी 58 वर्ष की आयु पूरी हो चुकी है। ऐसे में बीते पांच महीने से किस आधार पर सरकार ने इन्हें प्रबंध निदेशक के पद पर नियुक्त किया हुआ है।
इसे लेकर स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। उन्होंने प्रबंध निदेशक पर भ्रष्टाचार करने वालों को संरक्षण देने का आरोप लगाया। अध्यक्ष खरवाड़ा ने कहा कि जिन अधिकारियों-कर्मचारियों ने भ्रष्टाचार किया है, उनके खिलाफ कार्रवाई करने की जगह प्रबंध निदेशक ने उन्हें पदोन्नति दी है। एमडी की विफलता के चलते फील्ड कर्मचारियों के साथ दुर्घटनाओं के मामले बढ़े हैं। ऊहल परियोजना आज तक शुरू नहीं हो सकी है। नई भर्तियों की फाइल बंद हो गई है। उन्होंने कहा कि अब प्रबंध निदेशक के साथ यूनियन बैठक नहीं करेगी। बोर्ड के चेयरमैन प्रबोध सक्सेना से ही बातचीत की जाएगी। अगर सरकार ने मांगों को पूरा नहीं किया तो पूरे प्रदेश में प्रदर्शन किए जाएंगे।
एमडी आफिस बना तबादला गिरोह का अड्डा
इंप्लाइज यूनियन के अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि एमडी का आफिस तबादला गिरोह का अड्डा बन गया है। भारतीय मजदूर संघ से जुड़ा एक सेवानिवृत्त कर्मी एमडी के दफ्तर में बैठकर मुख्यमंत्री की धौंस दिखाकर मनमाने तरीके से कर्मचारियों के तबादले करवाता है। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग भी की।