हिमाचल प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र मंगलवार से शुरू होने जा रहा है। विधानसभा सचिवालय को विधायकों की तरफ से प्रश्नकाल में पूछे जाने को करीब सवा चार सौ सवाल मिल चुके हैं। इनमें 390 तारांकित और 30 अतारांकित आ चुके हैं।
ये संख्या हर रोज बढ़ती ही रहेगी। सत्र के पहले दिन ही प्रश्नकाल में विधायकों की प्राथमिकता वाली जनता की स्कीमों में लेटलतीफी का मामला गूंज सकता है। सत्तासीन भाजपा के एक विधायक कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में इन योजनाओं में लेटलतीफ ी होने का मामला उठाने जा रहे हैं।
विधायक केंद्र सरकार को योजनाओं की डीपीआर वक्त रहते नहीं भेजे जाने के मामले में भी पूर्व की सरकारें और वर्तमान सरकार की अफसरशाही पर निशाना साध सकते हैं। इसी तरह से बजट सत्र के पहले दिन विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान कई सवाल गूंजेंगे। इन पर मंत्री जवाब देंगे।
हिमाचल की इस तेरहवीं विधानसभा के दूसरे यानी बजट सत्र की शुरुआत मंगलवार को 11 बजे शोकोद्गार और प्रश्नकाल से होगी। विधायकों की ओर से नाबार्ड के माध्यम से बनाई जा रही सड़कों की स्थिति, बिजली सब स्टेशन स्थापित करने में देरी, सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद नौतोड़ की स्वीकृति, इको टूरिज्म योजना में प्रदेश के बेरोजगारों को लाभ नहीं मिलने, अनुसूचित जाति उपयोजना में सड़कों-पुलों के कार्यों का अधूरा होना जैसे कई विषयों पर सवाल लगाए हैं।
बस सेवा, सब्जी मंडियों का जीर्णोद्धार, अग्निशमन सुविधाओं में ढील जैसे कई मुद्दों पर भी सवाल पूछे जाएंगे। विधानसभा के बजट सत्र के पहले दिन अनुपूरक बजट की प्रथम एवं अंतिम किस्त भी सदन के पटल पर रखी जाएगी।
नौ मार्च को अपना पहला बजट पेश करेंगे जयराम, 29 मार्च को पारित होगा
वित्तीय वर्ष 2018-19 का वार्षिक बजट नौ मार्च को पेश किया जाना है। बतौर वित्त मंत्री मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर अपना पहला बजट पेश करेंगे। 17 से 25 मार्च के बीच विधानसभा में अंतराल का अवकाश रहेगा।
इसके बाद बजट सत्र 26 मार्च से शुरू होगा। 29 मार्च को बजट को पारित कर दिया जाएगा। विधानसभा के बजट सत्र का समापन पांच अप्रैल को होगा। अगला बजट 30 से 33000 करोड़ रुपये तक हो सकता है।
आज विधायक दल बनाएंगे रणनीति
प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में भाजपा के 44, कांग्रेस के 21 और अन्य 3 विधायक हिस्सा लेंगे। अन्य में दो निर्दलीय और एक माकपा के एमएलए शामिल होंगे।
भाजपा और कांग्रेेस विधायक दलों की सोमवार को बैठकें होंगी। बैठकों में दोनों ही दल एक-दूसरे के खिलाफ मोर्चाबंदी पर मंत्रणा करेंगे। कांग्रेस का रुख सत्तासीन भाजपा के खिलाफ आक्रामक रह सकता है।