प्रदेश की गिरती विकास दर और 47,500 करोड़ रुपये के कर्ज के बीच मुख्यमंत्री जयराम के बजट पिटारे से कई घोषणाएं हुईं। किसानों को सस्ती बिजली, नई योजनाओं में किसानों-बागवानों को जल से कृषि बल, सौर सिंचाई, शून्य लागत जैविक खेती की प्राकृतिक खेती, खुशहाल किसान से लेकर मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना से साबित किया की प्रदेश की जीडीपी में नौ प्रतिशत हिस्से वाले कृषि सेक्टर को सुधार गिरती विकास दर में बढ़ोतरी की कोशिश हुई है।
हिमाचल गृहिणी सुविधा योजना से महिलाओं की रसोई में गैस और चूल्हा देने के साथ उनकी सुरक्षा पर गुड़िया हेल्पलाइन की प्रतिबद्धता दिखी। पशुपालन, मधुमक्खी पालन और मत्स्य पालन तक में नई योजनाएं देकर कृषि आधारित आर्थिकी की रीढ़ मजबूत की गई है।
जयराम ने अपनी चुनावी घोषणाओं में जनता से कई वादे किए, जिसमें कुछ की छाप बजट में दिखी। दृष्टिपत्र का गोसेवा आयोग का वादा मुख्यमंत्री ने पूरा कर गोवंश के प्रति राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की कोशिशों को आगे बढ़ाया है। स्वरोजगार की बात मुख्यमंत्री स्वावलंबन और मुख्यमंत्री युवा आजीविका योजना के लिए 155 करोड़ रखा है।
मुख्यमंत्री जयराम के सूटकेस से निकाली घोषणाएं कांग्रेस और सीपीएम को सूट नहीं कर रही हैं। विपक्ष एक सुर में इसे नकार रहा है, जिसकी तीन वजहें बताई गई हैं। बेरोजगारों के लिए नौकरियां, कर्जे से उबरने के लिए कोई उपाय नहीं होने और राजस्व बढ़ाने की दिशा तय नहीं होना अखर रहा है।
इन मुद्दों पर घेराबंदी की तैयारी में विपक्ष
- 47,500 करोड़ कर्जा घटाने पर सरकार मौन
- नई नौकरियों को लेकर सरकार ने नहीं दिया रोडमैप
- प्रदेश सीमा पर बैरियर से एंट्री टैक्स नहीं हटा
- रूसा खत्म करने पर बजट में कुछ नहीं
- पुरानी पेंशन योजना के लिए समिति का गठन नहीं