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बागवानों की कमाई पर मौसम की मार: आधा रह गया सेब कारोबार, हिमाचल की अर्थव्यवस्था को 1,000 करोड़ की चपत

Mon, 12 Oct 2026 09:14 AM IST
Ankesh Dogra सुरेश शांडिल्य, शिमला।

सार

हिमाचल प्रदेश में इस बार मौसम की मार से सेब कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। पिछले साल मंडियों में 2.65 करोड़ पेटियां पहुंची थीं, जबकि इस बार यह आंकड़ा डेढ़ करोड़ तक सिमटने का अनुमान है। बागवानी विभाग के अनुसार, इससे प्रदेश को 800 से 1,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो सकता है। पढ़ें पूरी खबर...

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हिमाचल में सेब कारोबार पर मौसम की मार। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश की आर्थिकी की रीढ़ माने जाने वाले सेब कारोबार पर इस बार मौसम की बड़ी मार भारी पड़ी है। पिछले साल की तुलना में सेब कारोबार आधा रह गया है। शिमला, कुल्लू, मंडी और किन्नौरमें सेब हजारों परिवारों की आजीविका का प्रमुख आधार है। इसका असर बागवानों की आय पर तो पड़ा ही है साथ ही परिवहन, पैकिंग से जुड़े कामकाज, मजदूरों, दुकानदारों आदि का व्यवसाय पर प्रभावित हुआ है। इससे सरकार की आमदनी भी घटेगी।

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पिछले साल जहां प्रदेश की मंडियों में 2.65 करोड़ पेटियां पहुंची थीं, वहीं इस बार कारोबार डेढ़ करोड़ पेटियों तक सिमटने का अनुमान है। ऐसा होने पर प्रदेश की आर्थिकी को 1,000 करोड़ रुपये तक की चपत लग सकती है। सेब सीजन अब अंतिम दौर में है। अब किन्नौर के ऊंचाई वाले क्षेत्रों से ही कुछ खेप मंडियों में पहुंचने की उम्मीद है। ऐसे में कारोबार में बड़ी बढ़ोतरी की संभावना कम है। मौसम की बेरुखी और जलवायु परिवर्तन का असर इस बार सेब सीजन पर साफ दिखाई दिख रहा है। सेब की कम आवक से बागवानों की कमाई बहुत प्रभावित हुई है। कर्ज में डूबे कई बागवान बैंकों की किस्तें देने की स्थिति में नहीं हैं। 

सेब सीजन के दौरान प्रदेश में बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलता है और इससे होने वाली आमदनी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देती है। कारोबार घटने से इन तमाम गतिविधियों पर भी असर पड़ रहा है। सेब की पेटियां मंडियों में कम पहुंचने से परिवहन कारोबार पर भी असर पड़ा है। सेब कारोबार कमजोर रहने का असर प्रदेश के स्थानीय बाजारों में भी दिखने लगा है। बागवानों की आमदनी घटने से उनकी खरीद क्षमता प्रभावित हुई है। बागवान सेब बेचकर मिलने वाली रकम का इस्तेमाल घरेलू जरूरतों के अलावा कपड़े, कृषि उपकरण, निर्माण सामग्री और अन्य वस्तुओं की खरीद में करते हैं। जब उनकी कमाई घटती है तो बाजारों में खरीद-फरोख्त भी कम हो जाती है। 

इससे विभिन्न तरह के सामान की बिक्री प्रभावित हो रही है। सेब सीजन की कमजोरी का असर बागवानों के साथ व्यापारियों और दूसरे कारोबारियों तक पहुंच रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार सेब कारोबार आधा रहने से फसल को रेट अच्छे मिले। वरना हिमाचल में सेब का कारोबार भी 1500 करोड़ रुपये तक लुढ़कता।

2,500 करोड़ रुपये तक सिमट सकता है सेब कारोबार
बागवानी विभाग का एक अनुमान है कि सेब कारोबार 2,500 करोड़ रुपये  तक सिमट सकता है। राज्य बागवानी विभाग के निदेशक डॉ. सतीश शर्मा का कहना है कि हिमाचल प्रदेश में औसतन सेब सीजन का कारोबार 3,000 से 3,500 करोड़ रुपये के बीच आंका जाता है। प्रदेश की अन्य बागवानी फसलों को भी इसमें शामिल कर लिया जाए तो फलों का कारोबार लगभग 5,000 करोड़ रुपये सालाना तक पहुंच जाता है। यदि इस बार सेब सीजन डेढ़ करोड़ पेटियों में ही सिमट जाता है तो प्रदेश को 800 से 1000 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो सकता है। हालांकि, नुकसान का सही आकलन सेब सीजन समाप्त होने के बाद ही किया जा सकेगा।

राजस्व भी कम होगा 
पिछले वर्ष के मुकाबले अभी तक बाजार में करीब 50 फीसदी से कम सेब जाने से 5,000 करोड़ की अर्थव्यवस्था में अनेक व्यवसायों में लोगों की आय  गिरेगी। कामकाज घटेगा, रोजगार पर बात आएगी क्योंकि अर्थव्यवस्था में हर सेक्टर एक दूसरे को मांग पैदा करते हैं। साथ ही सभी सेक्टरों या व्यवसायों में कारोबार कम होने से राज्य के राजस्व में भी कमी आएगी। प्रदेश की वित्तीय स्थिति के लिए यह और भी मुसीबत पैदा करेगी। - डॉ. राकेश शर्मा, एसोसिएट प्रोफेसर अर्थशास्त्र
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इस बार मौसम से बागवानों का साथ नहीं दिया। सर्दियों में नाममात्र की बर्फ गिरी।  जब सेब के पेड़ों पर फूल आए तो मौसम अनुकूल नहीं रहा। इससे फूलों का परागण नहीं हुआ। ओलावृष्टि भी हुई। नई पौध अभी पूरी तरह से फसल बढ़ाने की स्थिति में नहीं है। - डॉ. विजय सिंह ठाकुर, पूर्व कुलपति, नौणी विवि
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