हरियाणा के गुरुग्राम में सर्च वारंट लेकर हेलिकॉप्टर कंपनी के कार्यालय गई पुलिस टीम को करीब दस घंटे तक नजरबंद रखा गया। इस दौरान पुलिस टीम को फोन पर बात करने की छूट थी लेकिन कहीं पर जाने की अनुमति नहीं थी। मंगलवार देर रात को पुलिस की टीम शिमला लौट आई है। अब इस मामले में जिला पुलिस अदालत जाने की तैयारियों में जुट गई है। पुलिस अदालत के समक्ष जांच में हस्तक्षेप करने और वारंट की तामिल नहीं होने से संबंधित दस्तावेजों को सौंपेगी। नियमों के तहत अदालत से वारंट जारी होने के बाद उसकी तामिल होने या न होने के बारे में पुलिस को अवगत करवाना पड़ता है।
बताया जा रहा है कि मामले में दोनों राज्यों के पुलिस महानिदेशकों के बातचीत के साथ ही सरकार के स्तर पर भी हस्तक्षेप किया गया है। पुलिस टीम को इस दौरान करीब 10 घंटे तक नजरबंद रखा गया है। जिला पुलिस के मुताबिक हरियाणा में सर्च के लिए जाने के दौरान सभी नियमों की पालना की गई थी। हेलीकॉप्टर कंपनी के कार्यालय में दबिश देने से पहले पुलिस ने राजेंद्रा पार्क सेक्टर 105 पुलिस थाने में बाकायदा रपट लिखवाई थी और इसके बाद संबंधित थाने की पुलिस को भी साथ लेकर गई थी। इसके बाद जैसे ही पुलिस की टीम कंपनी के कार्यालय में पहुंची और अपनी जांच को शुरू किया तो बड़ी संख्या में पुलिस बल पहुंचा और उन्हें पुलिस थाने लेकर चला गया। इस दौरान मौके से जांच से संबंधित किसी भी प्रकार के दस्तावेजों को भी पुलिस टीम को कब्जे में नहीं लेने दिया गया है। इससे पुलिस को हवाई सेवाओं पर हुए खर्च का ब्योरा नहीं मिल पाया है और उसे खाली हाथ लौटना पड़ा। वहीं, बात करने पर एसपी शिमला ने बताया कि वारंट की तामिल नहीं होने पर न्यायिक प्रक्रिया के तहत कोर्ट को अवगत करवाया जाएगा।