हिमाचल के पंचायतीराज विभाग में अपना तकनीकी विंग बनेगा। अभी तक सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग और लोक निर्माण विभाग से कनिष्ठ अभियंता से अधिशासी अभियंता तक पदों पर तैनाती प्रतिनियुक्ति से की जाती थी। दोनों विभागों के अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति खत्म कर अपने मूल विभागों में लौटने को कहा गया है। प्रदेश में कुल 3226 पंचायतें हैं। तकनीकी विंग बनाने की मांग लंबे समय से की जा रही थी।
राज्य ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग के सचिव आरएन बत्ता ने इस संबंध में अधिसूचना जारी की है। इसके अनुसार प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में विकासात्मक कार्यों के डिजाइन, निष्पादन और आवश्यक ढांचागत सुविधाओं के रखरखाव और समग्र विकास को तकनीकी विंग बनाया जाना है। विभाग के तहत काम करने वाले तकनीकी अधिकारी पंचायत, पंचायतों के समूहों, ब्लॉकों और विधानसभा में क्षेत्रवार होने वाले कार्यों का निष्पादन करेंगे।
अधिसूचना के बाद लोनिवि और आईपीएच विभाग से प्रतिनियुक्ति से आए तकनीकी अधिकारियों को अपने मूल विभाग में लौटने को कहा है। ग्रामीण विकास विभाग जेई से लेकर एक्सईएन तक पद भरेगा। अभी तक दोनों विभागों से तकनीकी अधिकारी सिर्फ समायोजन के लिए आते रहे हैं। ये अधिकारी तीन माह से एक साल की अवधि के बाद वापस लौट जाते थे।
तकनीकी विंग में ये होगी व्यवस्था
संबंधित जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला स्तरीय तकनीकी कर्मचारियों के नियोक्ता प्राधिकारी और प्रशासनिक प्राधिकारी होंगे। मंडल स्तरीय अधिशासी अभियंता जिला परिषद उसके क्षेत्राधिकार में पड़ने वाले तकनीकी विंग के कर्मचारियों के तकनीकी प्रमुख होंगे। अधिशासी और सहायक अभियंता का तबादला प्रभारी मंत्री के अनुमोदन में होगा। तकनीकी कर्मचारियों की वरिष्ठता सूची को राज्य स्तर पर निदेशक पंचायतीराज जिलों से प्राप्त सूची के आधार पर अंतिम रूप देंगे। विंग को मजबूत करने के लिए समय समय दिशा-निर्देश भी जारी होंगे।