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हिमाचल पंचायत चुनाव: पुनर्मतगणना के लिए 10 मिनट के भीतर लिखित में करना होगा आवेदन, गाइडलाइन जारी

Sun, 24 May 2026 11:27 AM IST
Ankesh Dogra अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

हिमाचल प्रदेश में पंचायतीराज चुनाव में नई गाइडलाइन के अनुसार मतगणना पूरी होने के बाद रिटर्निंग अधिकारी या सहायक रिटर्निंग अधिकारी द्वारा प्रत्याशियों को प्राप्त मतों की घोषणा की जाएगी। इसके तुरंत बाद प्रत्याशी या उनके मतगणना एजेंट को पुनर्मतगणना की मांग के लिए केवल 10 मिनट का समय मिलेगा। पढ़ें पूरी खबर...
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पंचायत चुनाव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश में पंचायतीराज चुनाव में मतगणना को निष्पक्ष, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए निर्वाचन आयोग ने दिशानिर्देश जारी किए हैं। आयोग के सचिव सुरजीत सिंह राठौर ने बताया कि मतगणना प्रक्रिया, रिकाउंटिंग, सुरक्षा प्रबंधन और मतपत्रों की छंटनी को लेकर सख्त नियम लागू किए गए हैं।

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नई गाइडलाइन के अनुसार मतगणना पूरी होने के बाद रिटर्निंग अधिकारी या सहायक रिटर्निंग अधिकारी द्वारा प्रत्याशियों को प्राप्त मतों की घोषणा की जाएगी। इसके तुरंत बाद प्रत्याशी या उनके मतगणना एजेंट को पुनर्मतगणना की मांग के लिए केवल 10 मिनट का समय मिलेगा। आयोग ने स्पष्ट किया है कि रिकाउंटिंग के लिए आवेदन लिखित रूप में देना अनिवार्य होगा। मौखिक अनुरोध स्वीकार नहीं किए जाएंगे। निर्देशों के अनुसार रिटर्निंग अधिकारी आवेदन को पूरी तरह स्वीकार, आंशिक रूप से स्वीकार अथवा अस्वीकार कर सकता है। 

आवेदन अस्वीकार करने की स्थिति में कारण को लिखित रूप देना होगा। अंतिम परिणाम घोषित होने के बाद किसी भी प्रकार की पुनर्मतगणना की मांग स्वीकार नहीं होगी। सामान्य परिस्थितियों में किसी प्रत्याशी को रिकाउंटिंग का केवल एक ही अवसर मिलेगा। यदि मुकाबला बराबरी पर छूटता है, तब भी पुनर्मतगणना भी एक ही बार की जाएगी। हालांकि विशेष परिस्थितियों में रिटर्निंग अधिकारी विवेकाधिकार का उपयोग कर सकते हैं। आयोग ने चेतावनी दी कि किसी भी स्तर पर लापरवाही होने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पंचायत चुनावों में एक ही मतपेटी में तीन अलग-अलग रंगों के मतपत्र डाले जाते हैं। 

मतपेटी खोलने के बाद सबसे पहले मतपत्रों को बिना खोले रंग के आधार पर अलग किया जाएगा। मतपत्र लेखा से उनका मिलान होगा। इसके बाद मतपत्रों को मिश्रित कर प्रत्याशियों के पक्ष में पड़े मतपत्रों के 25-25 के बंडल बनाए जाएंगे। पंचायत समिति और जिला परिषद चुनावों के लिए भी अलग व्यवस्था है। आयोग ने निर्देश दिए हैं कि अलग-अलग रंगों के मतपत्रों को पृथक करते समय विशेष सावधानी बरती जाए ताकि किसी भी वार्ड के मतपत्र मिश्रित न हों।

सीसीटीवी, वीडियोग्राफी और वेब-कास्टिंग अनिवार्य
मतगणना प्रक्रिया की निगरानी के लिए आयोग ने सभी मतगणना केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे या वीडियोग्राफी की व्यवस्था अनिवार्य कर दी है। कैमरे इस प्रकार लगाए जाएंगे कि मतगणना टेबल और एजेंट स्पष्ट रूप से दिखाई दें। रिकॉर्डिंग को कम से कम तीन महीने तक सुरक्षित रखा जाएगा। संवेदनशील और अति संवेदनशील मतगणना केंद्रों पर वेब-कास्टिंग की व्यवस्था भी की जाएगी। वहीं पोस्टल बैलेट को निर्धारित समय तक प्राप्त होने के बाद संबंधित पद के सामान्य मतपत्रों के साथ मिश्रित कर ही गिना जाएगा, ताकि मतदान की गोपनीयता बनी रहे।
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एजेंट ही रहेगा मौजूद : भीड़ नियंत्रण के लिए आयोग ने निर्देश दिया है कि जिस वार्ड की मतगणना चल रही होगी, केवल उसी वार्ड के एजेंट को मतगणना कक्ष में बैठने की अनुमति होगी। हालांकि प्रधान और उपप्रधान के प्रत्याशी या उनके एजेंट पूरी प्रक्रिया के दौरान मौजूद रह सकेंगे। 

पहले वार्ड सदस्यों की काउंटिंग : पहले सभी वार्ड सदस्यों की मतगणना पूरी नहीं हो जाती, तब तक उप-प्रधान और प्रधान पद के मतों की गिनती शुरू नहीं की जाएगी।

प्रधान की अंत में होगी मतगणना
राज्य निर्वाचन आयोग ने मतगणना का क्रम भी निर्धारित कर दिया है। पंचायत चुनाव में सबसे पहले वार्ड सदस्य पदों की मतगणना होगी। इसके बाद उप-प्रधान और अंत में प्रधान पद के मतों की गिनती की जाएगी। यदि किसी वार्ड में सदस्य निर्विरोध चुना गया है तो अगले वार्ड की मतगणना शुरू की जाएगी। 
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