हिमाचल प्रदेश में जनगणना की तैयारियां तेज हो गई हैं। पहले चरण में भवनों और मकानों की गणना 15 जुलाई तक पूरी की जानी है। इस प्रक्रिया को सुचारू और सटीक बनाने के लिए जनगणना अधिकारियों को राजस्व विभाग के कानूनगो और पटवारियों की मदद लेने की अनुमति दी गई है। राजस्व अधिकारियों की सहायता से गांवों, बस्तियों और शहरी क्षेत्रों की सीमाओं का सही निर्धारण किया जाएगा, ताकि किसी भी भवन या परिवार का विवरण छूट न जाए।
जनगणना कार्य के दौरान यदि किसी क्षेत्र की सीमा, राजस्व रिकॉर्ड या गांवों की भौगोलिक स्थिति को लेकर कोई संशय उत्पन्न होता है तो संबंधित कानूनगो और पटवारी मौके पर पहुंचकर अधिकारियों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराएंगे। इसके लिए राजस्व अधिकारियों की उपस्थिति अनिवार्य रखी गई है। प्रशासन का मानना है कि राजस्व विभाग के सहयोग से गणना कार्य में पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित होगी। जनगणना निदेशालय की ओर से विभिन्न जिलों में अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। भवन गणना के दौरान प्रत्येक मकान, व्यावसायिक प्रतिष्ठान, सरकारी भवन और अन्य संरचनाओं का रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।
इसके आधार पर आगामी जनसंख्या गणना का विस्तृत खाका तैयार होगा। प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन ने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए हैं। भवन गणना जनगणना की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है, क्योंकि इसी के आधार पर आगे परिवारों और व्यक्तियों से संबंधित आंकड़े जुटाए जाएंगे। हिमाचल के सभी जिलों में जनगणना से जुड़े प्रारंभिक कार्यों को गति दी जा रही है। प्रशासन का लक्ष्य निर्धारित समय सीमा के भीतर भवन गणना का कार्य पूरा करना है। जनगणना से प्राप्त आंकड़े भविष्य की विकास योजनाओं, संसाधनों के वितरण और सरकारी नीतियों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।