जम्मू-कश्मीर की सरहद के साथ लगते विकास खंड सलूणी के लंगेरा गांव में आजादी के बाद भी नेटवर्क की सुविधा उपलब्ध नहीं है। हालात यह हैं कि गांव में रहने वाले लोगों को फोन पर बात करने के लिए दस किमी दूर जाना पड़ता है। गांव के दस किमी के दायरे में किसी भी मोबाइल कंपनी का नेटवर्क नहीं चलता। हालांकि, गांव में रहने वाले सभी परिवारों के पास मोबाइल फोन हैं लेकिन, लोग मोबाइल फोन का इस्तेमाल ज्यादातर गेम खेलने के लिए करते हैं। मोबाइल में किसी भी कंपनी का नेटवर्क नहीं आता, जिसकी वजह से ग्रामीण परेशान हैं।
जेएंडके की सरहद से अगर गांव में किसी प्रकार की घुसपैठ हो जाए तो ग्रामीणों को पुलिस को इसकी सूचना देने के लिए दस किमी दूर संघनी जाना पड़ेगा। हालांकि, बॉर्डर पर पुलिस विभाग की ओर से चेकपोस्टें स्थापित की गई हैं। ऐसे में गांव में मोबाइल नेटवर्क का होना और भी ज्यादा जरूरी है लेकिन, हैरानी इस बात की है कि किसी भी सरकार ने लंगेरा गांव में मोबाइल नेटवर्क शुरू करने की पहल नहीं की।
ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के दौरान वोट लेने के लिए नेता लोगों से मोबाइल टावर स्थापित करने के लुभावने वायदे करते हैं लेकिन, बाद में अपने वायदों को पूरा करने के लिए कोई भी नेता हामी नहीं भरता। विस चुनाव में भी ग्रामीणों ने चुनाव का बहिष्कार करने का निर्णय लिया था।
उस दौरान प्रशासनिक और राजनितिक आश्वासन मिलने के बाद ही ग्रामीणों ने मतदान किया। चुनाव के तीन वर्ष बाद भी मोबाइल टावर गांव में नहीं लग पाया है। दूर संचार विभाग के अधिकारी मुख्तयार ने बताया कि लंगेरा में टावर लगाने के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा है। इसकी अनुमति मिलते ही लंगेरा में मोबाइल टावर और सेटेलाइट सिस्टम को संचालित कर दिया जाएगा।