दुनिया भर में मशहूर ट्राउट फिश को कोरोना काल में खरीदार नहीं मिल रहे हैं। कोलबांध में मत्स्य विभाग ने पिछले दो माह में केवल 80 किलो ट्राउट फिश की बिक्री की है। झील में अभी भी 4 टन मछली बिक्री के लिए तैयार है। विभाग ने कुछ सप्ताह पहले ट्राउट के दाम 550 से 450 रुपये प्रति किलोग्राम किए थे। बावजूद खरीदार नहीं मिल रहे हैं। 16 जून से मछली का शिकार दो माह के लिए बंद होने जा रहा है। अब विभाग ट्राउट मछली के दाम 350 रुपये प्रति किलोग्राम करने जा रहा है।
छह माह पहले मत्स्य विभाग ने करीब 30 हजार ट्राउट का बीज कोलबांध में डाला था। यह बीज विभाग ने कोलबांध झील में ट्रायल के लिए डाला था कि यहां पर ट्राउट तैयार करने के लिए वातावरण सही है या नहीं। लेकिन इस झील का वातावरण इतना सही निकला कि तीन से चार माह में ही यहां पर 300 से 350 ग्राम तक की ट्राउट तैयार हो गई। ट्राउट तैयार होने के बाद इसके लिए ग्राहक नहीं मिल रहे हैं। प्रदेश से महानगरों के बड़े बड़े होटलों में ट्राउट भेजी जाती है। लेकिन कोविड में लगे लॉकडाउन के बाद लगभग होटल बंद रहे और जहां होटल खुले रहे वहां पर कारोबार नहीं हुआ। जिसके चलते ट्राउट कि डिमांड न के बराबर रही।
मत्स्य विभाग के अतिरिक्त निदेशक श्याम लाल ने बताया कि पिछले दो माह में कोलबांध से केवल 80 किलो ट्राउट की बिक्री हुई है। अभी करीब चार टन ट्राउट सप्लाई के लिए तैयार है, लेकिन कोविड के कारण ग्राहक नहीं मिल रहे हैं। बिक्री न होने के चलते बीच में इसके दाम 450 रुपये प्रति किलो कर दिए गए थे। उसके बावजूद भी ग्राहक नहीं मिल रहे हैं। अब कोलबांध में तैयार की गई ट्राउट के दाम 350 रुपये प्रति किलोग्राम करने के लिए आला अधिकारियों को पत्र लिखा गया है।