पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के गृह जिला हमीरपुर में एक अन्य जिले से संबंध रखने वाले वरिष्ठ नेता के बढ़ते दखल से चर्चाओं का बाजार गर्म है। नेताजी के दखल से लोक निर्माण विभाग हमीरपुर में खूब उठापटक हो रही है। हमीरपुर से सटे दूसरे जिले के डिवीजन में विकास कार्यों और बजट वितरण को लेकर पूर्व में भी संबंधित नेता और लोनिवि के अधिकारियों के बीच नोकझोंक हो चुकी है।
पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के गृह जिला हमीरपुर में एक अन्य जिले से संबंध रखने वाले वरिष्ठ नेता के बढ़ते दखल से चर्चाओं का बाजार गर्म है। नेताजी के दखल से लोक निर्माण विभाग हमीरपुर में खूब उठापटक हो रही है। हमीरपुर से सटे दूसरे जिले के डिवीजन में विकास कार्यों और बजट वितरण को लेकर पूर्व में भी संबंधित नेता और लोनिवि के अधिकारियों के बीच नोकझोंक हो चुकी है।
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अधिकारी सभी डिवीजनों में बराबर बजट खर्च करने का तर्क दे रहे हैं तो नेता हमीरपुर के बजाय अपने डिवीजन में सबसे अधिक काम करवाने पर अड़े हैं। इसके चलते थोड़े-थोड़े अंतराल के बाद लोनिवि के वरिष्ठ अधिकारियों के तबादले जारी हैं। इससे हमीरपुर में सियासी पारा चढ़ा हुआ है।
उक्त नेता की सरकार में गहरी पैठ के चलते हमीरपुर का कोई भी विधायक या भाजपा नेता खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। सरकार के साढ़े तीन साल के कार्यकाल में हमीरपुर में चार चीफ इंजीनियर का तबादला हो चुका है। यही हाल लोनिवि के अधीक्षण अभियंताओं का है।
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प्रदेश में भाजपा सत्तासीन हुई तो हमीरपुर में लोनिवि के चीफ इंजीनियर पद पर बीआर धीमान सेवारत थे। इसके बाद जेएस गुलेरिया की नियुक्ति हुई। एक साल बाद ही गुलेरिया का तबादला हो गया। उनकी जगह पीसी बंधन की नियुक्ति हुई, लेकिन चार माह में ही बंधन का तबादला हो गया।
अब ऊना जिले से संबंध रखने वाले डीएस देहल को फरवरी में हमीरपुर में लोनिवि का चीफ इंजीनियर नियुक्त किया है। अधीक्षण अभियंता (एसई) पद पर एनपी सिंह की जगह एनपीएस चौहान की नियुक्ति जून 2019 में हुई। दो साल के भीतर ही चौहान का तबादला कर दिया गया। उनकी जगह बीते दिन मंडी से धर्मशाला के लिए ट्रांसफर हुए विजय चौधरी को फिर हमीरपुर में लोनिवि के अधीक्षण अभियंता के पद पर ट्रांसफर ऑर्डर हुए हैं।
उधर, कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष एवं विधायक राजेंद्र राणा ने कहा कि लोक निर्माण विभाग मुख्यमंत्री के पास है, लेकिन इस विभाग को कोई और ही नेता चला रहा है। अधिकारियों और कर्मचारियों पर बेवजह दबाव बनाया जा रहा है। मामले की जानकारी होने के बावजूद मुख्यमंत्री चुप्पी साध बैठे हैं।