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Himachal News: सी फार्म देने में देरी तो कारोबारियों पर लगेगा जुर्माना, जानें विस्तार से

Tue, 24 Feb 2026 10:03 AM IST
अंकेश डोगरा अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

हिमाचल प्रदेश में अब सी फार्म देने में देरी पर कारोबारियों पर जुर्माना लगेगा। राज्य कर एवं आबकारी विभाग ने केंद्रीय बिक्री कर (हिमाचल प्रदेश) नियम 1970 में संशोधन के तहत इस नई व्यवस्था को लागू किया है। पढ़ें पूरी खबर...
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हिमाचल प्रदेश सरकार। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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हिमाचल सरकार ने केंद्रीय बिक्री कर (सीएसटी) से जुड़े घोषणापत्र और प्रमाणपत्रों के लिए आवेदन प्रक्रिया में बदलाव कर दिया है। अब सी फार्म देने में देरी पर कारोबारियों पर जुर्माना लगेगा। पहले तकनीकी कारणों से सी- फार्म जमा नहीं होने पर अन्य राज्यों के साथ कारोबार नहीं हो सकता था।

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अब प्रमाणपत्र जारी होने से छह महीने बाद तक कारोबारी बिना परेशानी कारोबार कर सकेंगे लेकिन, उन्हें 50 हजार रुपये जुर्माना देना होगा। राज्य कर एवं आबकारी विभाग ने केंद्रीय बिक्री कर (हिमाचल प्रदेश) नियम 1970 में संशोधन के तहत इस नई व्यवस्था को लागू किया है। इसके तहत नियम 6-बी में नया प्रावधान जोड़कर घोषणा पत्र या प्रमाणपत्र के दोबारा जारी करने की प्रक्रिया को व्यवस्थित और जवाबदेह बनाने का प्रयास किया गया है।

नए नियम के अनुसार यदि कोई कारोबारी घोषणापत्र या प्रमाणपत्र बनने की तिथि से छह महीने बाद ऑनलाइन आवेदन करता है, तो संबंधित अथॉरिटी उसे सुनवाई का अवसर देने के बाद देरी को कंपाउंड कर सकेगी। इसके लिए कारोबारी को नए फॉर्म के मूल्य का 0.1 प्रतिशत या न्यूनतम 50,000 रुपये (जो भी अधिक हो) जुर्माने के रूप में जमा कराने होंगे। जुर्माना जमा होने के बाद संबंधित अथॉरिटी पुराने फॉर्म रद्द करने और नए फॉर्म जारी करने की सिफारिश संबंधित जोन के ज्वाइंट कमिश्नर को करेगी। अंतिम स्वीकृति के बाद ही नए फॉर्म जारी किए जाएंगे।

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विभागीय अधिकारियों ने बताया कि कई दफा तकनीकी कारणों के चलते आवेदन करते समय सी फार्म जमा नहीं होते थे, इस कारण कारोबारियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता था। अब हुए संशोधन से घोषणा पत्रों और प्रमाणपत्रों की ऑनलाइन प्रणाली को मजबूती मिलेगी और समय पर आवेदन करने की प्रवृत्ति बढ़ेगी। लंबे समय बाद फॉर्म जारी कराने के मामलों में होने वाली अनियमितताओं पर भी रोक लग सकेगी। कई मामलों में व्यापारी लंबे समय बाद घोषणा पत्रों के लिए आवेदन करते हैं, जिससे कर निर्धारण और रिकॉर्ड सत्यापन में दिक्कत आती है। नए नियम से अब व्यापारियों को समय पर आवेदन करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
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